तीन वर्ष की अवधि खत्म, फिर भी CMO कार्यालय में जमे अधिकारी-कर्मचारी: ‘आपसी तालमेल’ से चल रहा अघोषित तंत्र?

चंदौली। उत्तर प्रदेश सरकार की स्थानांतरण नीति के अनुसार किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की एक ही पद व जनपद में सामान्य तैनाती अधिकतम तीन वर्ष निर्धारित है। इसके बावजूद चंदौली के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में CMO सहित कई डॉक्टर और बाबू वर्षों से एक ही महत्वपूर्ण कार्यभार संभाले बैठे हैं, जिससे न केवल नियमों की अनदेखी उजागर होती है बल्कि विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों का कहना है कि CMO कार्यालय में कुछ अधिकारी-कर्मचारी तीन वर्ष नहीं बल्कि चार से छह वर्ष से अधिक समय से दवा खरीद, NHM फंड के उपयोग, आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति-भुगतान, निजी नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड केंद्रों के पंजीकरण-नवीनीकरण तथा PC-PNDT जैसे संवेदनशील कार्य देख रहे हैं। इन्हीं कार्यों को लेकर अक्सर शिकायतें सामने आती रही हैं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, लंबे समय से जमे इन अधिकारियों-कर्मचारियों के बीच आपसी तालमेल का ऐसा तंत्र बन गया है जो तबादला न होने का प्रमुख कारण माना जा रहा है। आरोप है कि यह तालमेल व्यवस्था को अपने पक्ष में बनाए रखने और संभावित अनियमितताओं पर परदा डालने में सहायक बन रहा है। इसी कारण स्थानांतरण की प्रक्रिया बार-बार टलती दिख रही है।

नियमों के तहत तीन वर्ष पूरे होने पर जिला प्रशासन द्वारा शासन को तबादले की संस्तुति भेजना अनिवार्य है। सवाल यह है कि क्या चंदौली में यह प्रक्रिया पूरी की गई या फिर इस ?अघोषित संगठन? के आगे नियम भी बेबस नजर आ रहे हैं?

स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विभाग में वर्षों से जमी टीम पर उठ रहे सवाल अब कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। शासन और जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर स्थानांतरण नीति को सख्ती से लागू करे ताकि व्यवस्था पर मंडरा रहे संदेह दूर हो सकें।