एटा: यूजीसी के विरोध में सवर्ण समाज के लोगों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम जलेसर को सौंपा।

*एटा: यूजीसी के विरोध में सवर्ण समाज के लोगों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम जलेसर को सौंपा।*

*संवाददाता: रमेश जादौन सिटी अपडेट न्यूज़।*

जलेसर/एटा:

सेवा में,
माननीय राष्ट्रपति महोदय,
भारत गणराज्य
नई दिल्ली
द्वारा
उपजिला अधिकारी जलेसर एटा।
विषय: UGC की नीतियों/नियमों में व्याप्त असमानता व सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों की रक्षा हेतु ज्ञापन।

महोदय,

निवेदन है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू कुछ नवीन नियम/प्रावधान छात्रों के बीच समानता के संवैधानिक सिद्धांत के अनुरूप नहीं हैं। इन नीतियों के कारण समाज में असंतुलन, अविश्वास तथा शैक्षणिक वातावरण में तनाव उत्पन्न हो रहा है।

UGC के वर्तमान प्रावधानों में यह व्यवस्था की गई है कि SC/BC वर्ग के छात्र ?सामाजिक भेदभाव? की शिकायत विभिन्न स्तरों पर कर सकते हैं, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए ऐसी समान, स्पष्ट और प्रभावी शिकायत-निवारण व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। इसके परिणामस्वरूप यदि किसी सामान्य वर्ग के छात्र के विरुद्ध शिकायत दर्ज होती है?चाहे वह निराधार ही क्यों न हो?तो उसके पास समान स्तर पर अपनी बात रखने, सुरक्षा पाने अथवा निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित कराने का स्पष्ट मार्ग नहीं बचता।

यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) की भावना के विपरीत है। किसी भी कानून या नीति का उद्देश्य सभी नागरिकों/छात्रों के लिए समान न्याय, समान अवसर और समान संरक्षण सुनिश्चित करना होना चाहिए। वर्ग के आधार पर अधिकारों का असंतुलन न केवल सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि शिक्षा संस्थानों में भय और पक्षपात की आशंका भी बढ़ाता है।

अतः माननीय राष्ट्रपति महोदय से विनम्र अनुरोध है कि?

1. UGC की इन नीतियों/नियमों की संवैधानिक समीक्षा कराई जाए।
2. सभी वर्गों के छात्रों के लिए समान, पारदर्शी और निष्पक्ष शिकायत-निवारण तंत्र अनिवार्य किया जाए।
3. झूठी/निराधार शिकायतों से छात्रों की रक्षा हेतु स्पष्ट दिशानिर्देश और दंडात्मक प्रावधान तय किए जाएँ।
4. शिक्षा परिसरों में न्यायपूर्ण, संतुलित और भय-मुक्त वातावरण सुनिश्चित किया जाए।

हमें पूर्ण विश्वास है कि आपका हस्तक्षेप देश की शिक्षा व्यवस्था में समानता, न्याय और विश्वास को सुदृढ़ करेगा।

रिपोर्ट: रमेश जादौन एटा।