हरदोई पहुंची महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, शंकराचार्य विवाद पर दिया बयान, बोली- वो शंकराचार्य है या नहीं, ये जांच का विषय

हरदोई। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव शनिवार को एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हरदोई पहुंचीं। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रदेश की राजनीति, संत समाज और हालिया विवादों को लेकर अपनी स्पष्ट राय रखी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपर्णा यादव ने कहा कि वे वास्तव में शंकराचार्य हैं या नहीं, यह जांच का विषय है। सनातन धर्म में चार शंकराचार्यों की स्पष्ट व्यवस्था है और यह देखा जाना चाहिए कि क्या उनके पास शंकराचार्य की वैध उपाधि है या नहीं। उन्होंने कहा कि संत समाज को संयम और मर्यादा में रहकर अपनी बात रखनी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं एक संत और गुरु हैं। ऐसे में उनके लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। एक संत के आचरण में धैर्य और शांति होनी चाहिए, गुस्सा संतों को शोभा नहीं देता। माघ मेले में हुई अव्यवस्थाओं पर उन्होंने कहा कि यह भी जांच का विषय है और जहां कहीं भी व्यवस्था बिगड़ी है, उसकी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान से ऊपर कोई नहीं है और सभी को इसके दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए।
अखिलेश यादव द्वारा भाजपा पर त्रिवेणी को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अपर्णा यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री स्वयं संत हैं, इसलिए उनकी धारणा संतों के प्रति नकारात्मक नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि किसी की छींटाकशी से उत्तर प्रदेश की विकास गति पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है।
वहीं, तलाक से जुड़े सवाल पर अपर्णा यादव ने साफ कहा कि यह उनका निजी विषय है और इस पर सार्वजनिक टिप्पणी उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ कर रही हैं।