*मामला आमातालाब रोड स्थित एक निजी अस्पताल का...* *सरकारी एम्बुलेंस बनी निजी अस्पतालों की दलाली गाड़ी....*

धमतरी/चारामा 

सरकारी 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं के निजी अस्पतालों की दलाली गाड़ी बनने और मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस गंभीर और सनसनीखेज प्रकरण के सामने आने के बाद स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन हरकत में आ गया है। चारामा विकासखंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. शंखवार ने इस पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त उचित कार्रवाई करने का ठोस आश्वासन दिया है।

गौरतलब है कि हाल ही में धमतरी शहर अंबेडकर - रुद्री रोड आमा तालाब के पास सरकारी एम्बुलेंस निजी अस्पताल की दलाली गाड़ी बन गया है, यह खुलासा हुआ था कि आपातकालीन सरकारी एंबुलेंस के चालक और सहायक कुछ निजी अस्पतालों के साथ मिलकर बड़ा कमीशनखोरी का खेल खेल रहे हैं। जब जरूरतमंद मरीज सरकारी मदद के लिए 108 या 102 पर कॉल करते हैं, तो ये कर्मी मौके पर पहुंचकर सरकारी अस्पतालों में बेड और डॉक्टरों की कमी का झूठा डर दिखाते हैं। इसके बाद वे भोले-भाले मरीजों को गुमराह कर सीधे निजी अस्पतालों के हवाले कर देते हैं, जहां इलाज के नाम पर गरीबों की जेबों पर डाका डाला जाता है। इस अवैध और अमानवीय धंधे के कारण प्रसूताओं और गंभीर मरीजों की जान पर भी लगातार खतरा मंडरा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जब पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने इस लापरवाही को प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष उठाया, तो चारामा बीएमओ डॉ. शंखवार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकारी एंबुलेंस का इस तरह का दुरुपयोग किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले चाहे एंबुलेंस चालक हों या इस रैकेट में लिप्त कोई अन्य कर्मचारी, किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।बीएमओ डॉ. शंखवार ने बताया कि इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए विभागीय स्तर पर एक उच्च स्तरीय जांच बिठाई जा रही है।

जागरूक नागरिको का कहना है कि एंबुलेंस के मूवमेंट, जीपीएस ट्रैकिंग डेटा और आपातकालीन कॉल रिकॉर्ड (सीआरएस) की गहन पड़ताल की जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन-किन मामलों में मरीजों को नियमों के विरुद्ध जाकर निजी अस्पतालों में पहुंचाया गया है। बीएमओ ने यह भी भरोसा दिलाया कि जांच रिपोर्ट सामने आते ही इसमें संलिप्त पाए जाने वाले सभी दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

स्वास्थ्य अधिकारी के इस रुख के बाद क्षेत्र के नागरिकों और पीड़ितों में यह उम्मीद जगी है कि शायद अब इस गोरखधंधे पर लगाम लगेगी। हालांकि, लोगों का यह भी कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी सरकारी तंत्र का इस्तेमाल दलाली के लिए करने की हिम्मत न जुटा सके। स्वास्थ्य विभाग की इस नई पहल पर अब पूरे इलाके की निगाहें टिकी हैं कि क्या वास्तव में इस रैकेट की जड़ें काटी जा सकेंगी या यह मामला भी कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगा और पूरा मामले को मरीज के ऊपर सहमति के नाम कागज का टुकड़ बना पेश कर मामले से इतिश्री कर ली जाएगी।

आपको यह भी पता दे कि पहले भी इसी प्रकार के एक मामले में ड्राइवर के ऊपर कार्यवाही की गई है , साथ ही उक्त निजी अस्पताल में गंभीर लापरवाही बरतने के चलते पेनल्टी भी लगी थी ।।।।

चुनेश साहू 7049466638