सोशल मीडिया पर नाबालिगों के खातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का स्पर्श संस्था ने किया स्वागत

 

*कांकेर, 29 सितंबर।* सोशल मीडिया पर नाबालिगों के खातों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कांकेर जिले में बाल अधिकारों के लिए काम कर रही स्पर्श संस्था ने स्वागत किया है।

संस्था ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस संभावना पर विचार करने को कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए ऐसे कानूनी नियम बनाए जाएं, जिनके तहत नाबालिगों से संबंधित भारतीय कानूनों का पालन करना उनके लिए अनिवार्य हो।

उल्लेखनीय है कि स्वयंसेवी संस्थाओं के देश के सबसे बड़े नेटवर्क 'जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन्स अलायंस' (JRC) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया जाए कि नाबालिगों को अनुबंध करने का कानूनी अधिकार नहीं है, इसलिए ऑनलाइन सेवाओं तक उनकी पहुंच के लिए सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। स्पर्श संस्था JRC की सहयोगी संस्था है और देश के 782 जिलों में बाल अधिकारों के लिए अभियान चल रहा है।

*बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा जरूरी - उमेश साहू*

स्पर्श संस्था के कांकेर जिला परियोजना समन्वयक उमेश कुमार साहू ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भारत के कानूनों का उल्लंघन करने से रोकना जरूरी है। ऑनलाइन दुनिया में बच्चों के सामने यौन शोषण, मानव तस्करी, सेक्सटॉर्शन, निजी डेटा के दुरुपयोग और साइबर बुलिंग जैसे खतरे हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से बच्चों की ऑनलाइन शोषण से रक्षा हो सकेगी।

बताया गया कि याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। पीठ ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ अनुबंध के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह महज दिशा-निर्देश बनकर नहीं रहना चाहिए, इसे इंटरमीडियरी नियमों के ढांचे में शामिल करने पर विचार किया जाए।