मो. कामरान गिरोह के खिलाफ जांच और कार्रवाई हेतु एसटीएफ (STF) को पत्र कई जांच एजेंसियां भी कसेंगी शिकंजा

*महाफर्जीवाड़ा: एनजीओ की आड़ में विदेशी फंडिंग, फर्जी प्रिंटिंग प्रेस और दर्जनों समाचार पत्रों का काला खेल!*

 

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक और मीडिया गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। मोहम्मद कामरान नामक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने अपनी पत्नी के साथ मिलकर एक कथित एनजीओ की आड़ में फर्जी दस्तावेजों, फर्जी पतों और गायब कराई गई सरकारी फाइलों के दम पर करोड़ों रुपये का काला साम्राज्य खड़ा कर रखा है।

 

*फर्जी पतों पर दर्ज हैं प्रिंटिंग प्रेस और दर्जनों अखबार*

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, 'अनंत सामाजिक एवं सांस्कृतिक वेलफेयर सोसाइटी' (Anant Samajik Evam Sanskritik Welfare Society) नामक संस्था के नाम पर यह पूरा खेल खेला जा रहा था। इस संस्था के माध्यम से लगभग दो दर्जन से अधिक समाचार पत्रों का पंजीकरण कराया गया है।

चौंकाने वाली बात यह है कि जिन प्रिंटिंग प्रेसों और पतों?जैसे लखनऊ के इंदिरा नगर (आवास संख्या 18/495) एवं संजय गांधी पुरम (मल्टीमीडियम प्रिंटिंग प्रेस, पता- 310, संजय गांधी पुरम, फैजाबाद रोड)?के आधार पर ये अखबार और प्रिंटिंग मशीनें रजिस्टर्ड कराई गईं, वे पते धरातल पर मौजूद ही नहीं हैं या वहां कोई वैध प्रिंटिंग प्रेस संचालित नहीं हो रही है।

 

*कागजों पर चल रहा अवैध साम्राज्य और फर्जी घोषणा पत्र*

 * आरएनआई और डीएवीपी में फर्जीवाड़ा: मोहम्मद कामरान ने आरएनआई (RNI), डीएवीपी (DAVP) और सूचना विभाग में फर्जी मशीनों का विवरण देकर और फर्जी घोषणा पत्र प्रस्तुत कर सरकारी विभागों की आंखों में धूल झोंकी है।

 * विज्ञापनों के नाम पर करोड़ों का गबन: अपने कई अखबारों की फर्जी सर्कुलेशन संख्या दिखाकर और उन्हें डीएवीपी पैनल में शामिल कराकर विज्ञापनों के नाम पर करोड़ों रुपये का गबन किया गया है। वर्ष 2012 में हुई जांच में इन सभी अखबारों का सर्कुलेशन शून्य यानी 'Non-existing' पाया गया था, जिसके बाद भारत सरकार ने फरवरी 2013 में इनकी डीएवीपी मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बावजूद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बावजूद फर्जीवाड़ा जारी रहा।

 

 *मोहम्मद कामरान द्वारा फर्जी तरीके से संचालित प्रमुख समाचार पत्र और पत्रिकाएं:*

   * न्यूज़वेब (अंग्रेजी दैनिक, हिंदी मासिक, हिंदी दैनिक)

   * अवध क्लासिफाइड (अंग्रेजी/हिंदी साप्ताहिक)

   * इनफाइनाइट न्यूज़ (हिंदी साप्ताहिक)

   * लखनऊ दर्शन (हिंदी/अंग्रेजी साप्ताहिक)

   * ऐलान-ए-अवध और कौमी ऐलान / कौमी मुकाम (उर्दू दैनिक, जिनकी कमान पत्नी सादिया हसन व अन्य के नाम पर दिखाई गई)

   * वेब पोर्टल जैसे "वाइस ऑफ़ मुस्लिम" भी इसी पते से संचालित होना पाया गया है।

विकास दीप बिल्डिंग से गायब कराई फाइलें, विदेशी फंडिंग और आईएसआई (ISI) का शक!

मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब इस एनजीओ के माध्यम से विदेशी फंडिंग और देशविरोधी तत्वों/ISI से जुड़े तारों के जरिए करोड़ों रुपये हासिल करने की बात सामने आई। जब इस पूरे फर्जीवाड़े के रिकॉर्ड और फाइलें खंगालने की कोशिश की गई, तो विकास दीप बिल्डिंग स्थित संबंधित कार्यालय से इस एनजीओ से जुड़ी पूरी सरकारी फाइल ही गायब करा दी गई। इससे स्पष्ट होता है कि इस पूरे खेल में अंदरूनी विभागीय साठगांठ भी शामिल है।

मुख्य बिंदु एवं सख्त मांगें:

 * ब्लैकलिस्ट और एफआईआर: संबंधित फर्जी एनजीओ, उसके संचालक मोहम्मद कामरान, उसकी पत्नी और सहयोगियों को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा उनके खिलाफ संगीन धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।

 * विभागीय जवाबदेही: चिटफंड एवं सोसाइटी कार्यालय से सरकारी फाइल गायब कराने के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

 * वित्तीय जांच: विज्ञापनों के नाम पर सरकारी धन का गबन करने और संदिग्ध विदेशी फंडिंग की उच्च स्तरीय जांच एजेंसियों (जैसे ईडी और एटीएस) से कराई जाए।