भगवान भाव के भूखे हैं, भक्ति में जाति-धर्म और उम्र की बाधा नहीं : आचार्य राकेश त्रिपाठी

आलापुर (अंबेडकरनगर) | जहांगीरगंज विकासखंड के सुन्दरपुर खालसा गांव में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर रहे। कथा व्यास आचार्य राकेश त्रिपाठी महाराज ने भगवान की भक्ति का महत्व बताते हुए कहा कि भगवान भाव के भूखे हैं। भक्त और भगवान के बीच जाति, धर्म और उम्र की कोई बाधा नहीं होती। भगवान अपने भक्त के निर्मल भाव और अटूट श्रद्धा को देखते हैं।

उन्होंने ध्रुव चरित्र और भक्त प्रहलाद की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि ध्रुव की तपस्या तथा प्रहलाद की अटूट आस्था और विश्वास ने भगवान को प्रकट होने के लिए विवश कर दिया। भगवान को सच्चे मन से की गई भक्ति के अलावा कुछ नहीं चाहिए। उन्होंने अजामिल और भरत जी के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि इनके जीवन से सेवा, समर्पण और सम्मान की सीख मिलती है। जिसे संसार अपनाने से इनकार कर देता है, उसे भगवान स्वयं अपना लेते हैं।

कथा के दौरान भजनों और संगीतमय प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। बड़ी संख्या में पहुंचे महिला-पुरुष श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

इस अवसर पर मुख्य यजमान राम जनम गोस्वामी, त्रिलोकी गोस्वामी, रामबहादुर गोस्वामी, जितेन्द्र सिंह, विजय प्रकाश गोस्वामी और बलराम गोस्वामी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।