न्याय की डगर नहीं आसान पीड़ितों को गुमराह करने के लिये

रायबरेली।न्याय के लिए आम नागरिक को कितनी ठोकरें खानी पड़ती है और वही प्रशासनिक अमला न्याय देने में हेरा फेरी करे और न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध जाकर अपना फरमान सुनाये तो पीड़ित का भरोसा न्याय प्रणाली से उठ जाता है।ऐसा ही एक मामला ऊंचाहार तहसील में उजागर हुआ है जहां पर मामले में उच्च न्यायालय फैसला देते हुए तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा बरसंवा मजरे कंदरावाँ की नवीन परती भूमि गाटा संख्या 4033 को भू माफियाओं से मुक्त कराने के लिए प्रशासन को निर्देश दिया है।लेकिन उच्च न्यायालय के आदेश को लगभग दो तीन माह बीत चुके प्रशासनिक अधिकारियों के कानों में अब तक जूं नहीं रेंगा।बावजूद पीड़ित को पैमाइश के लिए एक और नोटिस थमा दिया जब पीड़ित ने नोटिस के बारे में कानून गो से मिलकर बात किया तो बताया गया कि पहले वाली फाइल कही खो गई है।इस वजह से इस पूरी प्रक्रिया को पुनः दोहराना पड़ेगा।अब सोचने वाली बात की प्रशासन के जिम्मेदार व्यक्ति और इस तरह के ओछे वक्तव्य किस ओर इशारा करते है कि पीड़ित व्यक्ति को फिर से पुरानी कहानी को नए सिरे से शुरू करे और प्रशासनिक अमला रसूखदार को खुश कर सके।न्याय के लिए आम नागरिक को कितने पापड़ बेलने पड़ते है शायद प्रशासनिक अधिकारियों को अच्छी तरह मालूम होगा।उच्च न्यायालय के आदेशों को प्रशासनिक अमला दरकिनार कर रसूखदार न्यायिक प्रक्रिया को अपना रहा है।जिससे पीड़ित व्यक्ति को न्याय प्रणाली को चिढ़ा रहा है।सोचने वाली बात की रसूखदार के लिए प्रशासनिक अमला कितने छंद फंद अपना रहा है कि न्याय मांगने वाला व्यक्ति न्याय की मांग न करे और प्रशासनिक अमला अपने हिसाब से रसूखदार और भू माफियाओं को लाभ दिलाते हुए न्याय करे।गाँव में एक पुरानी कहावत है कि "न सांप मरे और न लाठी टूटे"मतलब मामले को पूरी तरह उलझा दो ताकि न्याय न मांग सके।जबकि शासनिक बयान बताते है कि पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिले,न्यायालय कहता है कि भूमाफियों के कब्जे से अतिक्रमण युक्त जमीन 90 दिनों के अंदर खाली कराये।क्या ये बयान बाजी सिर्फ समाचार पत्रों में सुर्खियों को बटोरने के लिए है।जनपद में दूसरा मामला डीह थाना क्षेत्र के गोपालपुर का है जहां पीड़िता साधना पुत्री सुदामा सरोज पिछले पांच वर्षों से अपने खेतों में फसल नहीं उगा सकी और जब जब पीड़ित ने शिकायत किया धरने पर बैठी तो प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को ऐसा उलझाया कि न्याय की आस छूट गई।राजस्व विभाग के पास राजस्व से संबंधित सभी दस्तावेज अभिलेख मौजूद होने के बाद भी शिकायत कर्ता को इतना घूमना कि वह चकरा कर गिर पड़े और दोबारा न्याय के लिए खड़ा न हो।अभी कुछ दिन पूर्व पीड़िता जिलाधिकारी कार्यालय के पास धरने पर बैठी थी और जिलाधिकारी ने विपक्षियों पर मामला दर्ज करने का आदेश दिया,लेकिन अभी तक मामले में कोई कार्यवाही नहीं हुई है।