जसरा-मदरहा में रेलवे सिग्नल से छेड़छाड़ का मामला सिविल पुलिस को स्थानांतरित

प्रयागराज। जसरा-मदरहा के बीच रेलवे सिग्नल से छेड़छाड़ कर ट्रेन संचालन को प्रभावित करने के मामले में अब सिविल पुलिस द्वारा आगे की विवेचना की जाएगी। 24 अगस्त 2026 की रात प्रयागराज-मुंबई रेल मार्ग पर जसरा-मदरहा के बीच ट्रेन संख्या 15231 बरौनी-गोंदिया एक्सप्रेस के संचालन को प्रभावित करने और सिग्नल की हरी बत्ती को काली पॉलीथीन से ढकने का मामला सामने आया था।

रेलवे सुरक्षा बल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त सतर्कता से समय रहते मामले का पता चल गया था। रेलवे के अनुसार, इस कार्रवाई से संभावित रेल हादसा टल गया। मामले में आरपीएफ ने प्राथमिक कार्रवाई करते हुए मुकदमा अपराध संख्या 451/2026 के तहत रेलवे अधिनियम की धारा 153, 174 सी और 147 में मामला दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संगीत नाथ (19), निवासी जज्जी पुरवा थाना बारा प्रयागराज, राजन (21), निवासी काशीराम कॉलोनी जिला रायबरेली और माहिल (18), निवासी जज्जी पुरवा थाना बारा प्रयागराज के रूप में हुई। तीनों वर्तमान में बांदा जेल में निरुद्ध बताए गए हैं।

धारा 150 के तहत अब होगी कार्रवाई

मामले की गंभीरता और यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रकरण की विवेचना अब सिविल पुलिस थाना बारा को स्थानांतरित कर दी गई है। थाना बारा में रेलवे अधिनियम की धारा 150 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस धारा में रेलवे के सिग्नल या प्रकाश को छिपाने अथवा हटाने जैसे कृत्य भी शामिल हैं, यदि उनसे यात्रियों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होने की आशंका हो।

रेलवे अधिनियम की धारा 150 के तहत दोष सिद्ध होने पर आजीवन कारावास या दस वर्ष तक के कठोर कारावास का प्रावधान है। पहली दोषसिद्धि के मामले में कठोर कारावास सामान्यतः तीन वर्ष से कम नहीं होने का प्रावधान है, जबकि दूसरी या बाद की दोषसिद्धि में यह अवधि सात वर्ष से कम नहीं होती, हालांकि कानून में न्यायालय के लिए विशेष परिस्थितियों में अलग कारण दर्ज करने का प्रावधान भी है।

यदि धारा 150(2) में वर्णित परिस्थितियों में कृत्य से किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है या ऐसा कृत्य मृत्यु की अत्यधिक संभावना वाला पाया जाता है, तो कानून में मृत्युदंड या आजीवन कारावास का प्रावधान है।

रेलवे प्रशासन ने कहा है कि रेल पटरियों, सिग्नलिंग व्यवस्था और अन्य रेल परिसंपत्तियों से छेड़छाड़ यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। ऐसे मामलों में कानून के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।