जटिल कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी के बाद दो नन्हे बच्चों ने सुनी आवाजों की दुनिया, कटड़ा अस्पताल में सफल उपचार

कटड़ा। श्री माता वैष्णो देवी नारायणा सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल, कटड़ा में चिकित्सा क्षेत्र की एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। जन्म से ही कान की अंदरूनी संरचना में दुर्लभ विकृति के कारण गंभीर श्रवण हानि से जूझ रहे दो छोटे बच्चों की जटिल कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई। सर्जरी के बाद दोनों बच्चों में सुनने और विकास की दिशा में उत्साहजनक प्रगति देखी जा रही है। बच्चों के परिवारों ने भी उपचार के परिणामों पर खुशी जताई है।

दोनों बच्चों में इनकम्प्लीट पार्टिशन टाइप-1 नामक दुर्लभ जन्मजात आंतरिक कान की विकृति पाई गई थी। इस स्थिति में कान के भीतर स्थित कॉक्लिया की सामान्य आंतरिक संरचना पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती। इसके चलते बच्चों को कम उम्र से ही गंभीर से अत्यधिक श्रवण हानि का सामना करना पड़ सकता है।

इस विकृति में आंतरिक कान और मस्तिष्क के आसपास मौजूद मस्तिष्कमेरु द्रव के बीच असामान्य रूप से सीधा संपर्क होने की संभावना रहती है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी सामान्य मामलों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होती है। सर्जरी के दौरान मस्तिष्कमेरु द्रव के अचानक प्रवाह की आशंका रहती है, जिसे चिकित्सकीय रूप से सीएसएफ गशर कहा जाता है।

इन जटिल सर्जरियों को वरिष्ठ सलाहकार एवं कॉक्लियर इंप्लांट सर्जन डॉ. रोहन गुप्ता ने डॉ. रिमझिम शर्मा, सहायक प्रोफेसर तथा अस्पताल की कान, नाक एवं गला और कॉक्लियर इंप्लांट टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक पूरा किया। सर्जरी के दौरान अस्पताल की अनुभवी एनेस्थीसिया टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका नेतृत्व डॉ. पंकज गुप्ता ने किया।

दोनों बच्चों के उपचार में विशेष सावधानी बरती गई। सर्जरी के दौरान मस्तिष्कमेरु द्रव के अचानक प्रवाह से जुड़े जोखिम को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया गया। दोनों बच्चों में कॉक्लियर इंप्लांट के इलेक्ट्रोड को पूरी तरह स्थापित किया गया। इसकी स्थिति की पुष्टि सर्जरी के दौरान एक्स-रे और अत्याधुनिक स्मार्टएनएवी तकनीक की सहायता से की गई। दोनों बच्चों की सर्जरी के बाद स्थिति सामान्य रही और उनका स्वास्थ्य लाभ संतोषजनक रहा।

इनमें से एक बच्चा मात्र 14 महीने की उम्र में कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी से गुजरा। बच्चा आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से है और उसका उपचार श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की सहायता योजना के तहत कराया गया। परिवार बच्चे की लगातार हो रही प्रगति से बेहद खुश है।

वहीं, दूसरी बच्ची की कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी 17 महीने की उम्र में की गई। वर्तमान में बच्ची का नियमित पुनर्वास और श्रवण प्रशिक्षण चल रहा है। उसके परिवार ने भी उपचार के सकारात्मक परिणामों पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

डॉ. रोहन गुप्ता ने कहा कि इनकम्प्लीट पार्टिशन टाइप-1 एक दुर्लभ और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण आंतरिक कान की विकृति है। ऐसे बच्चों में कॉक्लियर इंप्लांट के लिए सावधानीपूर्वक जांच और सटीक शल्य तकनीक की आवश्यकता होती है। सर्जरी के दौरान होने वाला सीएसएफ गशर एक ज्ञात जटिलता है, जिसका तत्काल प्रबंधन जरूरी होता है। दोनों बच्चों का स्वास्थ्य अच्छा है और उनमें सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

डॉ. रिमझिम शर्मा ने कहा कि कॉक्लियर इंप्लांट बच्चों को ध्वनि की दुनिया से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन सर्जरी के बाद की नियमित चिकित्सा, श्रवण प्रशिक्षण, पुनर्वास और माता-पिता की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इन्हीं प्रयासों से बच्चों में सुनने, बोलने और संवाद करने की क्षमता को बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता है।

करीब 200 बच्चों को मिल चुकी है सुनने की नई उम्मीद

श्री माता वैष्णो देवी नारायणा सुपरस्पेशियलिटी अस्पताल के कॉक्लियर इंप्लांट कार्यक्रम के तहत अब तक करीब 200 सफल कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी की जा चुकी हैं। इनमें कई जटिल मामले भी शामिल रहे हैं। अस्पताल में सर्जरी के साथ-साथ बच्चों के उपचार को आगे बढ़ाने के लिए नियमित श्रवण जांच, इंप्लांट की मैपिंग, पुनर्वास और दीर्घकालीन देखभाल पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विशेष बात यह है कि बच्चों और उनके परिवारों को उपचार के बाद बार-बार कटड़ा आने की परेशानी कम करने के लिए अस्पताल की ओर से जम्मू और श्रीनगर स्थित आउटरीच केंद्रों के माध्यम से कॉक्लियर इंप्लांट के बाद की सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। श्रीनगर में अगली कॉक्लियर इंप्लांट फॉलोअप ओपीडी 6 अक्टूबर 2026 को आयोजित की जाएगी।

श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस के कार्यकारी निदेशक डॉ. यशपाल शर्मा ने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य केवल अत्याधुनिक सर्जरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बच्चों को सर्जरी के बाद लगातार उपचार और पुनर्वास की सुविधा देना भी है। करीब 200 सफल कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी और जम्मू तथा श्रीनगर के आउटरीच केंद्रों के माध्यम से नियमित फॉलोअप के जरिए जम्मू-कश्मीर के बच्चों तक विशेषज्ञ श्रवण चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस पूरे प्रयास में श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के निरंतर सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

इस सफलता ने उन परिवारों के लिए नई उम्मीद जगाई है, जिनके बच्चे जन्मजात श्रवण समस्या के कारण आवाजों की दुनिया से दूर हैं। अस्पताल में अत्याधुनिक सर्जरी, विशेषज्ञ चिकित्सा, नियमित पुनर्वास और घर के नजदीक फॉलोअप की सुविधा के माध्यम से बच्चों को सुनने और संवाद की दुनिया से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।