कानौता-बांदीकुई रेलखंड पर कवच प्रणाली की कमीशनिंग, अब और सुरक्षित होगा रेल परिचालन

कानौता-बांदीकुई रेलखंड पर कवच प्रणाली की कमीशनिंग, अब और सुरक्षित होगा रेल परिचालन

67 किलोमीटर लंबे रेलखंड के 7 ब्लॉक सेक्शनों में आधुनिक कवच प्रणाली शुरू, उत्तर पश्चिम रेलवे का पहला रेलखंड बना

जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे ने रेल संरक्षा को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जयपुर मंडल के कानौता-बांदीकुई के बीच 67 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर अत्याधुनिक स्टैंडर्ड कवच प्रणाली की सफलतापूर्वक कमीशनिंग की गई है। इसके साथ ही यह उत्तर पश्चिम रेलवे का पहला रेलखंड बन गया है, जहां स्टैंडर्ड कवच प्रणाली को शुरू किया गया है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक पंकज शर्मा के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में इस महत्वपूर्ण कार्य को पूरा किया गया। इस रेलखंड में कुल 7 ब्लॉक सेक्शनों को कवच प्रणाली से लैस किया गया है। इनमें कानौता-बस्सी, बस्सी-झर, झर-जटवाड़ा, जटवाड़ा-दौसा, दौसा-भांकरी, भांकरी-अरनिया और अरनिया-बांदीकुई शामिल हैं।

कवच प्रणाली की फील्ड इंस्टॉलेशन का सत्यापन करने के बाद फील्ड ट्रायल और संबंधित परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इस दौरान रेल संरक्षा से जुड़ी विभिन्न परिस्थितियों में प्रणाली की कार्यक्षमता जांची गई। झर-जटवाड़ा रेलखंड पर 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति से तथा कानौता-बस्सी रेलखंड पर निर्धारित पूर्ण सेक्शनल गति से परीक्षण किया गया। सभी संबंधित मानकों की भी जांच की गई।

टक्कर और ओवरस्पीडिंग से बचाव में मिलेगी मदद

स्टैंडर्ड कवच एक आधुनिक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। इसका उद्देश्य रेल परिचालन के दौरान संभावित आमने-सामने या पीछे से होने वाली टक्कर के जोखिम को रोकना है। निर्धारित परिस्थितियों में ट्रेन की गति सीमा का उल्लंघन होने पर यह प्रणाली स्वतः ब्रेक लगाने में भी सक्षम है।

इसके अलावा ब्लॉक सेक्शन में ट्रेन के अनचाहे या अनधिकृत रूप से रुकने पर स्वचालित एसओएस सुविधा सुरक्षा कार्रवाई में मदद करती है। ट्रेन के पीछे की ओर खिसकने या आगे की ओर अनधिकृत गति जैसी स्थितियों से बचाव के लिए भी इसमें विशेष प्रावधान किए गए हैं। आपात स्थिति में लोको पायलट मैनुअल एसओएस अलर्ट भी भेज सकता है।

कानौता-बांदीकुई रेलखंड पर कवच प्रणाली की सफल कमीशनिंग से उत्तर पश्चिम रेलवे में आधुनिक तकनीक के माध्यम से रेल संरक्षा को और मजबूती मिलेगी। इससे सुरक्षित, विश्वसनीय और बेहतर रेल परिचालन सुनिश्चित करने के रेलवे के प्रयासों को नई गति मिलेगी।