कबीर के निर्गुण भजनों से गूंजा आईआईटी बीएचयू, पद्मश्री भेरू सिंह चौहान ने बांधा समां

वाराणसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (का. हि. वि.), वाराणसी में गुरुवार को कबीर की निर्गुण वाणी और उनके अमर संदेशों से माहौल आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रंग में रंग गया। संस्थान के राजभाषा प्रकोष्ठकी ओर से एनी बेसेंट लेक्चर थिएटर (एबीएलटी-04) में ?कबीर निर्गुण गायन? कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश के सुप्रसिद्ध कबीर गायक एवं पद्मश्री सम्मानित भेरू सिंह चौहान ने अपनी मंडली के साथ कबीर के निर्गुण भजनों की प्रभावशाली प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में कबीर की वाणी के माध्यम से जीवन के मूल्यों, सामाजिक समरसता, आडंबर से मुक्ति और मानवता के संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। भेरू सिंह चौहान की गायकी में कबीर के दोहों और निर्गुण पदों की सहजता, गहराई और लोकधुनों का ऐसा संगम देखने को मिला कि सभागार में मौजूद श्रोता देर तक भावविभोर होकर प्रस्तुति सुनते रहे। उनकी मंडली के कलाकारों ने भी गायन और वाद्य संगत के माध्यम से कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। जैसे-जैसे कबीर की वाणी सुरों में ढलती गई, सभागार में मौजूद लोगों की रुचि और उत्साह बढ़ता गया। कबीर की रचनाओं में छिपे सामाजिक और मानवीय संदेशों को वर्तमान समय से जोड़ते हुए प्रस्तुति ने श्रोताओं को आत्ममंथन का अवसर भी दिया। कार्यक्रम में संस्थान के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और अन्य आमंत्रित अतिथि मौजूद रहे। आईआईटी बीएचयू जैसे तकनीकी शिक्षण संस्थान में इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन ने शिक्षा और भारतीय लोक परंपरा के बीच सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी एवं भारतीय लोक-सांस्कृतिक परंपरा के समृद्ध स्वरूप को नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा कबीर के सार्वभौमिक संदेश को व्यापक स्तर पर सामने लाना रहा। पद्मश्री भेरू सिंह चौहान की प्रस्तुति ने कबीर की उस परंपरा को मंच पर जीवंत किया, जिसमें जाति-पंथ, बाहरी आडंबर और भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता, प्रेम और सत्य को महत्व दिया गया है। निर्गुण गायन की लोकधुनों के साथ कबीर के संदेशों ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना की और तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया। आईआईटी बीएचयू के राजभाषा प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित यह सांस्कृतिक संध्या संस्थान में साहित्य, संगीत और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव को मजबूत करने वाली रही। तकनीकी शिक्षा के वातावरण के बीच कबीर की सहज और लोकभाषा में कही गई वाणी ने विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को भारतीय ज्ञान एवं लोक परंपरा के एक अलग आयाम से रूबरू कराया। कार्यक्रम के समापन पर कलाकारों का आभार व्यक्त किया गया। इस अवसर पर प्रस्तुत कबीर के निर्गुण भजनों की गूंज और उनके संदेशों की सार्थकता लंबे समय तक श्रोताओं के बीच चर्चा का विषय बनी रही।