कंपोजिट ग्रांट में बड़ा गोलमाल! महीने में 2-3 दिन स्कूल पहुंचती हैं प्रधानाध्यापिका?

कंपोजिट ग्रांट में बड़ा गोलमाल! महीने में 2-3 दिन स्कूल पहुंचती हैं प्रधानाध्यापिका?

ग्राम प्रधान के गंभीर आरोपों से शिक्षा विभाग में हड़कंप, एमडीएम से लेकर सरकारी धनराशि तक जांच की मांग_बीईओ बोले, लौटते ही होगी मौके पर पड़ताल

टड़ियावां/हरदोई

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सरकारी स्कूलों की व्यवस्था सुधारने और बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए मिलने वाली कंपोजिट ग्रांट की धनराशि पर टड़ियावां ब्लॉक के शिवरी गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम प्रधान रामलली ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रागिनी शर्मा पर विद्यालय में अनियमित उपस्थिति, कंपोजिट ग्रांट के उपयोग में कथित गड़बड़ी और मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए हैं।

ग्राम प्रधान का आरोप है कि प्रधानाध्यापिका माह में महज 2 से 3 बार ही विद्यालय आती हैं। वहीं विद्यालय में शौचालय निर्माण एवं मरम्मत, खिड़की की मरम्मत, नल की मरम्मत तथा नल व समरसेबल खराब होने पर आवश्यक कार्य ग्राम पंचायत स्तर से कराए जाते हैं। प्रधान का कहना है कि विद्यालय को मिलने वाली कंपोजिट ग्रांट से मुख्य रूप से रंगाई-पुताई का कार्य कराया जाता है, जबकि अन्य आवश्यक कार्य ग्राम प्रधान द्वारा कराए जाते हैं।

ग्रांट से लेकर एमडीएम तक उठे सवाल

ग्राम प्रधान ने प्रधानाध्यापिका पर कंपोजिट ग्रांट और मध्यान्ह भोजन की धनराशि में कथित अनियमितता के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों से गांव पहुंचकर विद्यालय के बच्चों, अभिभावकों और ग्रामीणों से जानकारी लेने की भी मांग की है, ताकि विद्यालय में प्रधानाध्यापिका की वास्तविक उपस्थिति और सरकारी योजनाओं के संचालन की स्थिति सामने आ सके।

अब जांच की बारी, दोष मिला तो कार्रवाई का दावा

मामले में टड़ियावां के खंड शिक्षा अधिकारी अनिल झां ने बताया कि प्रकरण उनके संज्ञान में है। उन्होंने कहा कि वह वर्तमान में अवकाश पर हैं और वापस लौटने के बाद मौके पर जांच कराएंगे। दोषी पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल यह है कि यदि आरोप सही हैं तो सरकारी धनराशि की निगरानी करने वाले तंत्र की नजर इतने समय तक कहां थी? जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विद्यालय की कंपोजिट ग्रांट और मध्यान्ह भोजन व्यवस्था में वास्तव में कोई अनियमितता हुई है या लगाए गए आरोप कितने सही हैं।

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