उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य आहत

समाजवादी पार्टी ने उन सीटों पर जीत हासिल की जहां कभी नहीं जीतती थी

उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों (5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र) के चुनाव परिणामों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। मतगणना के दौरान भाजपा ने कई सीटों पर मजबूत प्रदर्शन किया, लेकिन समाजवादी पार्टी ने कुछ महत्वपूर्ण सीटों पर कब्जा जमाया। इसी बीच उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे इन परिणामों से बहुत आहत हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि समाजवादी पार्टी ने उन सीटों पर चुनाव जीत लिया है जहां वह कभी नहीं जीतती थी।

केशव प्रसाद मौर्य ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ?एमएलसी चुनाव बहुत योग्य और शिक्षित लोगों के मताधिकार के आधार पर होता है। भारतीय जनता पार्टी ने अपना पिछला प्रदर्शन दोहराया है। हम लोग और अधिक सीटें जीतने की अपेक्षा कर रहे थे, लेकिन उतनी सीटें नहीं मिल पाई हैं। इसे भी देखेंगे कि समाजवादी पार्टी का खाता वहां कैसे खुल गया, जहां नहीं खुलना चाहिए था।?

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा इन सीटों का विश्लेषण करेगी और भविष्य के चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रयास करेगी। मौर्य ने यह भी स्पष्ट किया कि धांधली होती तो सपा खाता नहीं खोल पाती। उन्होंने जनता के जनादेश का सम्मान करने की बात कही और दावा किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का कमल फिर से खिलेगा।

राज्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार अब तक कई सीटों के नतीजे घोषित हो चुके हैं:

मेरठ स्नातक क्षेत्र: भाजपा के दिनेश कुमार गोयल विजयी।

लखनऊ शिक्षक क्षेत्र: भाजपा के उमेश द्विवेदी विजयी।

मेरठ शिक्षक क्षेत्र: भाजपा के श्रीचंद शर्मा विजयी।

बरेली-मुरादाबाद शिक्षक क्षेत्र: भाजपा के डॉ. हरि सिंह ढिल्लों विजयी।

वाराणसी शिक्षक क्षेत्र: समाजवादी पार्टी के लाल बिहारी यादव लगातार दूसरी बार विजयी। उन्होंने भाजपा के डॉ. प्रमोद मिश्रा को लगभग 5,015 मतों से हराया। लाल बिहारी यादव को कुल 11,612 मत मिले जबकि प्रमोद मिश्रा को 6,597 मत।

आगरा शिक्षक क्षेत्र: समाजवादी पार्टी के डॉ. आकाश अग्रवाल विजयी घोषित।

अन्य सीटों पर मतगणना जारी रही। वाराणसी स्नातक सीट पर सपा के आशुतोष सिन्हा आगे चल रहे थे, जबकि प्रयागराज-झांसी शिक्षक/स्नातक क्षेत्र में भी सपा के डॉ. मानपाल सिंह यादव जैसी जीत की खबरें आईं। गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर कड़ी टक्कर देखने को मिली।

कुल मिलाकर भाजपा ने 4 से अधिक सीटें जीतीं जबकि सपा ने कम से कम 2 सीटें अपने नाम कीं और कुछ और पर मजबूत बढ़त बनाए रखी। यह प्रदर्शन 2020 के मुकाबले सपा के लिए बेहतर माना जा रहा है।

ये चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल की तरह देखे जा रहे थे। शिक्षक और स्नातक सीटें शिक्षित वर्ग के मतदाताओं पर आधारित होती हैं, इसलिए इनका महत्व अलग है। वाराणसी जैसी सीट (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में आने वाली) पर सपा की जीत ने राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ा दी है। लाल बिहारी यादव की लगातार दूसरी जीत को सपा ने शिक्षकों के बीच अपने प्रभाव के रूप में पेश किया।

केशव प्रसाद मौर्य के बयान से साफ है कि भाजपा इन नतीजों से संतुष्ट नहीं है। पार्टी ने अपेक्षा की थी कि वह पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन करेगी, लेकिन कुछ सीटों पर सपा के अप्रत्याशित प्रदर्शन ने उसे झटका दिया। मौर्य ने कहा कि भाजपा उन क्षेत्रों का मंथन करेगी जहां सपा का खाता खुला।

दूसरी ओर सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह है। वाराणसी में लाल बिहारी यादव की जीत के बाद समर्थकों ने जश्न मनाया और अखिलेश यादव को धन्यवाद दिया। कुछ सपा नेताओं ने इसे 2027 के लिए शुभ संकेत बताया।

आगे क्या?

मतगणना पूरी होने के बाद अंतिम आंकड़े स्पष्ट होंगे। भाजपा इन परिणामों की समीक्षा कर अपनी रणनीति सुधारने पर जोर देगी, जबकि सपा इसे अपनी संगठनात्मक ताकत और शिक्षित वर्ग के बीच बढ़ते प्रभाव के रूप में पेश करेगी। 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी दोनों दलों के लिए अब और तेज हो गई है।

केशव प्रसाद मौर्य के शब्दों में?पार्टी जनता के जनादेश का सम्मान करती है, लेकिन जहां कमजोरी दिखी है, वहां सुधार का प्रयास जरूर किया जाएगा।