आयुष्मान आरोग्य सेंटर पर ताला, इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे ग्रामीणों को मिला इंतजार!

आयुष्मान आरोग्य सेंटर पर ताला, इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे ग्रामीणों को मिला इंतजार!

 

सुबह 10:49 बजे सेंटर के मुख्य द्वार पर लटका मिला ताला, CHO भी नदारद; आशा कार्यकर्ता ने बताया ?हड़ताल पर हैं?

 

#हरदोई

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ग्रामीणों को गांव में ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किए जा रहे आयुष्मान आरोग्य सेंटर की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला विकासखंड टड़ियावां क्षेत्र की ग्राम पंचायत कोटरा में संचालित आयुष्मान आरोग्य सेंटर का है, जहां बुधवार को निर्धारित समय में भी सेंटर के मुख्य द्वार पर ताला लटका मिला।

 

एक अखबार के संवाददाता जब बुधवार को मौके पर पहुंचा तो सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर सेंटर बंद मिला। मौके पर तैनात सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) भी मौजूद नहीं थीं। सेंटर के बाहर मौजूद आशा कार्यकर्ता से जब बंद रहने की वजह पूछी गई तो बताया गया कि CHO हड़ताल पर हैं।

 

हालांकि, सेंटर के बाहर हड़ताल अथवा अवकाश से संबंधित कोई सूचना या नोटिस दिखाई नहीं दिया। संवाददाता द्वारा CHO से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका मोबाइल नंबर स्विच ऑफ मिला।

 

एक दिन की तस्वीर नहीं, पुरानी फुटेज ने भी बढ़ाए सवाल

मामला यहीं खत्म नहीं होता। ग्रामीणों ने सेंटर की अलग-अलग तारीखों और समय की वीडियो फुटेज भी उपलब्ध कराई है। ग्रामीणों का दावा है कि इन फुटेज में भी सेंटर पर ताला लगा दिखाई देता है।

यदि ग्रामीणों द्वारा उपलब्ध कराई गई फुटेज की जांच में सेंटर के नियमित रूप से बंद रहने की पुष्टि होती है, तो यह सीधे तौर पर ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

सवाल_सेंटर बंद तो मरीज जाएं कहां?

आयुष्मान आरोग्य सेंटरों का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को उनके घर के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि सेंटर निर्धारित समय पर ही नहीं खुलेगा तो बीमार ग्रामीणों और जरूरतमंद मरीजों को स्वास्थ्य सुविधा आखिर मिलेगी कहां से?

ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, सेंटर के खुलने और बंद रहने की वास्तविक स्थिति की पड़ताल तथा जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग से है_क्या कोटरा आयुष्मान आरोग्य सेंटर की व्यवस्थाओं की वास्तविकता जांची जाएगी या फिर ग्रामीणों की शिकायतें भी सरकारी फाइलों में दबकर रह जाएंगी?

फिलहाल निगाहें स्वास्थ्य विभाग की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।

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