20 साल से लापता हिस्ट्रीशीटर को जीआरपी ने ढूंढ निकाला, एटा में बना रखा था नया ठिकाना

कासगंज। करीब 20 साल से लापता चल रहे हिस्ट्रीशीटर अनोखे का जीआरपी कासगंज ने पता लगा लिया। लगातार तलाश और सत्यापन के बाद उसका वर्तमान ठिकाना एटा जिले के थाना साकेत क्षेत्र के गांव अंगदपुर में मिला। जीआरपी ने उसका विवरण यक्ष एप पर अद्यतन कर दिया है और हिस्ट्रीशीट को थाना साकेत, एटा स्थानांतरित कराने के लिए उच्चाधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है।

हिस्ट्रीशीटर अनोखे पुत्र हंसराज मूल रूप से नगला मोती, थाना सोरों, कासगंज का रहने वाला है। उसकी उम्र करीब 50 वर्ष है। वर्ष 2001 में उसके खिलाफ ए श्रेणी की हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। पुलिस के अनुसार वर्ष 1995 से चलती ट्रेनों में डकैती, मारपीट, बलवा, चोरी, मादक पदार्थों की तस्करी सहित अन्य गंभीर अपराधों में उसकी संलिप्तता रही है।

हिस्ट्रीशीट खुलने के बाद अनोखे ने नगला मोती में अपना पुश्तैनी मकान और जमीन बेच दी और परिवार समेत वहां से चला गया। इसके बाद करीब 20 वर्षों तक उसके बारे में स्थानीय लोगों और पड़ोसियों को कोई जानकारी नहीं थी।

जीआरपी के अनुसार अनोखे कुछ समय दिल्ली के हैदरपुर में किराये के मकान में रहा। इसके बाद करीब चार वर्ष तक थाना ढोलना क्षेत्र के नगला भोपाल में पप्पू के मकान में रहा। फिर थाना ढोलना क्षेत्र के गांव इनायती निवासी मुन्नी देवी पत्नी बलवीर सिंह के पीर बाबा मंदिर के पास रहा। करीब 10 वर्षों से वह थाना साकेत, एटा क्षेत्र के गांव अंगदपुर में रह रहा था, जहां उसने स्थायी मकान भी बना लिया।

लगातार प्रयासों के बाद जीआरपी ने उसके वर्तमान ठिकाने का सत्यापन किया और उसका विवरण यक्ष एप पर अद्यतन किया। अब हिस्ट्रीशीट को थाना साकेत, एटा स्थानांतरित कराने की कार्रवाई की जा रही है, ताकि वहां भी उसकी लगातार निगरानी की जा सके।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार अनोखे के खिलाफ कुल नौ मुकदमे दर्ज हैं। इनमें मारपीट, बलवा, एससी/एसटी अधिनियम, चलती ट्रेन में डकैती, चोरी, मादक पदार्थों की तस्करी और शस्त्र अधिनियम के मामले शामिल हैं।

कार्रवाई करने वाली टीम में थाना प्रभारी कोमल कुंतल, उपनिरीक्षक उपेंद्र सिंह, हेड कांस्टेबल जयप्रकाश और कांस्टेबल सुमित कुमार शामिल रहे।