भाजपा सरकार में अधिकारी बेलगाम मुख्यमंत्री से शिकायत — ओंकार  सीईओ की सरकारी गाड़ी लग्जरी ररिसॉर्ट से मुख्यमंत्री के पास मामला..

 

धमतरी। धमतरी जिला पंचायत सीईओ द्वारा मध्यप्रदेश के लग्जरी रिसॉर्ट में लाल बत्ती लगी सरकारी गाड़ी ले जाने का मामला अब महज एक खबर नहीं, बल्कि जिले की राजनीति में बड़ा भूचाल बन चुका है। 'भास्कर दूत' द्वारा इस मामले के खुलासे के बाद प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है। एक तरफ जहां विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार और अफसरशाही पर हमलावर है, वहीं सत्ता पक्ष इसे बिना तथ्यों के उठाया गया मुद्दा बता रहा है। मध्यप्रदेश के बैहर स्थित लग्जरी 'मायरा सराय' (Maira Serai) रिसॉर्ट में धमतरी जिला पंचायत की 'CG-05' पासिंग वाली सरकारी गाड़ी खड़ी पाई गई थी। तस्वीरों में वाहन पर लाल बत्ती (बीकन) भी साफ नजर आ रही थी। सूत्रों के मुताबिक रिसॉर्ट में सीईओ जिला पंचायत के स्वयं ठहरने की बात सामने आने के बाद निजी छुट्टी के लिए सरकारी संसाधनों के बेजा इस्तेमाल पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में घमासान छिड़ गया है।
मामले पर हमलावर रुख अपनाते हुए धमतरी ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष खिलेन्द्र ध्रुव ने कहा, > "धमतरी में प्रशासनिक अराजकता और नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिला पंचायत सीईओ लाल बत्ती और सायरन लगी शासकीय गाड़ी का उपयोग छुट्टियों के दिनों में दूसरे राज्य में निजी सैर-सपाटे के लिए कर रहे हैं, जो सीधे तौर पर सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार है। जब अधिकारी ही बेलगाम हो चुके हैं, तो प्रशासन पर सत्ता पक्ष का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। आखिर किस अधिकारी की अनुमति से शासकीय वाहन को राज्य की सीमा से बाहर भेजा गया? यह जांच का विषय है।
कांग्रेस के तीखे आरोपों का जवाब देते हुए महापौर रामू रोहरा ने अपना पक्ष रखते हुए कहा, > "कांग्रेस का एकमात्र काम केवल राजनीति करना रह गया है, वे अपना काम करते रहें लेकिन उन्हें इस तरह की ओछी और छोटी राजनीति करने से बचना चाहिए। जिला पंचायत सीईओ या किसी प्रशासनिक अधिकारी के दौरे को लेकर जिस तरह की बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। यदि अधिकारी राज्य से बाहर गए हैं, तो बहुत संभव है कि वे किसी अति-आवश्यक शासकीय या प्रशासनिक कार्य के सिलसिले में ही गए हों। किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले पूरे मामले की आधिकारिक जानकारी ली जाएगी। कांग्रेस के पास अब जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दे खत्म हो चुके हैं, इसीलिए वह बिना तथ्यों की बयानबाजी और सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए राजनीति करने का प्रयास कर रही है।"
धमतरी विधायक ओंकार साहू ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, > "शासकीय संसाधनों और वाहनों का दुरुपयोग पूरी तरह से अनुचित है। जिला पंचायत सीईओ का वाहन लाल बत्ती और सायरन के साथ छुट्टी के दिनों में दूसरे राज्य में किस अधिकारी के परमिशन से गया, यह जांच और चिंता का विषय है। बिना अनुमति के शासकीय वाहन को अंतरराज्यीय सीमा से बाहर ले जाना नियमों का उल्लंघन है, जिसकी पूरी जानकारी ली जाएगी। इसके अलावा, नगर निगम का वह इनोवा वाहन, जिसका उपयोग पूर्व महापौर करते थे, वह वर्तमान में लापता है। यहां तक कि निगम उपायुक्त को भी इसके ठिकाने की कोई जानकारी नहीं है। एक तरफ अधिकारी बेलगाम होकर सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निगम की गाड़ियां गायब हैं। इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।"
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक ओंकार साहू ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को औपचारिक लिखित शिकायत भी प्रेषित की है, जिसमें उन्होंने जिला पंचायत सीईओ के शासकीय वाहन के निजी उपयोग तथा नगर निगम के गायब इनोवा वाहन (क्रमांक CG05AE5799) की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
इसी कड़ी में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिला अध्यक्ष निखिलेश दीवान ने भाजपा सरकार पर कहा, > "भाजपा सरकार के संरक्षण में अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा छत्तीसगढ़ को लूटने और बर्बाद करने का खेल खुलेआम चल रहा है। यहाँ के अधिकारी बेलगाम हो चुके हैं और छत्तीसगढ़ी जनता के अधिकारों व संसाधनों का खुलेआम अपमान कर रहे हैं। दूसरे राज्यों से आकर अधिकारी यहाँ की जनता के टैक्स के पैसों पर ऐश कर रहे हैं, लग्जरी रिसॉर्ट्स में छुट्टियां मना रहे हैं और लाल बत्ती का धौंस जमा रहे हैं। यह सरकार पूरी तरह से छत्तीसगढ़ विरोधी है। जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी इस तानाशाही को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी और कार्रवाई न होने पर सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन करेगी।"


दूसरी ओर, जिले के प्रशासनिक प्रमुख कलेक्टर ने इस संवेदनशील प्रकरण पर केवल इतना ही कहा कि उन्हें मामले में कुछ भी नहीं कहना है।
शहर के जागरूक नागरिकों का मानना है कि जिला प्रशासन को चाहिए कि वह वाहन के आवागमन से संबंधित सभी तथ्यों, अनुमति और लॉगबुक रिकॉर्ड्स की बारीकी से समीक्षा करे। हालांकि, बिना पूर्ण जांच के किसी नतीजे पर पहुंचना उचित नहीं होगा, लेकिन प्रशासन की चुप्पी से असमंजस गहरा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि मुख्यमंत्री को हुई लिखित शिकायत के बाद क्या ठोस कार्रवाई होती है या मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

चुनेश साहू 7049466638