मोहम्मद कामरान का पर्दाफाश: वकालत और RTI की आड़ में ब्लैकमेलिंग का बड़ा खेल, SC के आदेश की उड़ाईं धज्जियां!*

ब्लैकमेलिंग का नया पैंतरा: लखनऊ में ?कंप्लेंट माफिया? मोहम्मद कामरान का बेनकाब हुआ नेटवर्क

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में कानून, सूचना का अधिकार (RTI) और वकालत का चोला ओढ़कर ब्लैकमेलिंग और उगाही का एक संगठित सिंडिकेट चलाने वाले मोहम्मद कामरान का सच अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है, सूत्रों के मुताबिक मोहम्मद कामरान के सम्बन्ध विदेशी आतंकवादियों से भी है। तथाकथित आरटीआई एक्टिविस्ट और अधिवक्ता का दावा करने वाला यह व्यक्ति मोहम्मद कामरान पिछले एक दशक से शिकायतों को ढाल बनाकर प्रशासनिक अधिकारियों, उद्योगपतियों, प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों और नागरिकों को अपना निशाना बना रहा है।

*फर्जी शिकायतों का सिंडिकेट और अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग*

मोहम्मद कामरान ने शिकायतों का एक समानांतर नेटवर्क खड़ा कर रखा है:

* पोर्टलों का दुरुपयोग: जनसुनवाई पोर्टल (IGRS), डीएम कार्यालय और विभिन्न सरकारी विभागों में रोजाना मनगढ़ंत और तथ्यहीन शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं।

* प्रशासनिक दबाव और ब्लैकमेलिंग: इन शिकायतों का मकसद जनहित नहीं, बल्कि अधिकारियों का डर दिखाकर लोगों को दबाव में लेना, सौदेबाजी करना और पैसे ऐंठना है।

* अफसरों के नाम पर फर्जीवाड़ा: विशाल सिंह और संजय प्रसाद जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के नाम पर फर्जी पत्र भेजकर पूरे सरकारी तंत्र को गुमराह किया जा रहा है।

* टीम का जाल: इस नेटवर्क में तनवीर अहमद सिद्दीकी ,अनिल तिवारी और शेखर पंडित जैसे कई लोग शामिल बताए जा रहे हैं।

*सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जा और 'बुलडोजर' का सवाल*

दूसरों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले कामरान पर खुद अवैध कब्जों के गंभीर आरोप हैं:

* विकास दीप बिल्डिंग: कार्यालय के पास करीब 200 से 300 स्क्वायर फीट सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की बात सामने आई है।

* इंदिरा नगर आवास: अपने आवासीय परिसर के आसपास सार्वजनिक ज़मीन पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण का मामला प्रकाश में आया है।

अब जनता और जागरूक नागरिकों का सवाल है कि क्या लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) और जिला प्रशासन इस ?कंप्लेंट माफिया? के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाएगा?

*सुप्रीम कोर्ट में झूठा हलफनामा और अवमानना (Contempt of Court)*

कामरान का यह जाल केवल फर्जी शिकायतों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सर्वोच्च अदालत से जुड़े आदेशों के उल्लंघन तक फैला है:

सर्वोच्च अदालत का उल्लंघन: पूर्व में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा (Affidavit) देकर पत्रकारिता न करने का वचन देने के बावजूद, उसने नियमों को दरकिनार कर 'IPN News' (या INP News) नाम से एक यूट्यूब चैनल शुरू कर दिया है।

अब वह खुद को 'पॉडकास्टर' बताकर इंटरव्यू ले रहा है और पत्रकारिता के आवरण में अपना खौफ कायम करने की कोशिश कर रहा है। वरिष्ठ पत्रकार अनूप गुप्ता ने अपनी पत्रिका 'दृष्टान्त' में इसके कारनामों को उजागर किया था, जिसका मामला अदालत के समक्ष भी विचाराधीन है। इसके अलावा, सूचना विभाग से मान्यता न मिलने पर इसने हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की थी।

*सुरक्षा एजेंसियों की जांच और एफआईआर (FIR) की मांग*

ब्लैकमेलिंग के इस गठजोड़ से तंग आकर अब लखनऊ पुलिस, उत्तर प्रदेश शासन और सुरक्षा एजेंसियों से त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है:

* कठोर धाराओं में FIR: फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी तंत्र को भ्रमित करने और उगाही करने के आरोप में तत्काल प्राथमिकी दर्ज हो।

* SIT और NIA जांच: आईजीआरएस पर की गई पुरानी शिकायतों की गहन जांच की जाए और संदिग्ध संपर्कों की एनआईए (NIA) जैसी एजेंसियों से जांच कराई जाए।

* अवैध निर्माण का ध्वस्तीकरण: एलडीए द्वारा इंदिरा नगर और विकास दीप बिल्डिंग के पास सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाए जाएं।

कानून और आरटीआई जैसे पारदर्शी माध्यमों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए करने वाले इस 'कंप्लेंट माफिया' पर सख्त कानूनी शिकंजा कसना बेहद जरूरी हो गया है।