12 साल पुरानी जांच पर बड़ा सवाल! रिटायर्ड हेड कांस्टेबल ने डीजीपी से लगाई गुहार

12 साल पुरानी जांच पर बड़ा सवाल! रिटायर्ड हेड कांस्टेबल ने डीजीपी से लगाई गुहार

?छोटे अधिकारियों? से जांच कराकर मामले को घुमाने का आरोप, सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी बोला?वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए निष्पक्ष जांच

कानपुर नगर। पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए सेवानिवृत्त हेड कांस्टेबल दयाशंकर वर्मा ने पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश को प्रार्थना पत्र भेजकर वर्ष 2014 के एक मुकदमे की जांच निष्पक्ष एवं वरिष्ठ अधिकारी से कराए जाने की मांग की है।

प्रार्थना पत्र में दयाशंकर वर्मा ने आरोप लगाया है कि मामला करीब 12 वर्षों से जांच के फेर में उलझा हुआ है, जबकि उनके द्वारा लगातार अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर निष्पक्ष जांच की मांग की जाती रही। उनका आरोप है कि उच्च स्तर के अधिकारी से जांच कराने के बजाय छोटे अधिकारियों से जांच कराकर मामले को कथित रूप से उलझाया और गुमराह किया जाता रहा।

प्रार्थी के मुताबिक थाना बर्रा, कानपुर नगर में वर्ष 2014 में मुकदमा संख्या 517/2014, धारा 386, 389 और 506 के तहत मामला दर्ज हुआ था। प्रार्थी ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि न्यायालय द्वारा उन्हें मामले में बरी किया जा चुका है।

रिटायर्ड हेड कांस्टेबल ने प्रार्थना पत्र में पुलिस अधिकारियों की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब मामले में उच्च स्तर के अधिकारी द्वारा जांच की आवश्यकता है, तो बार-बार अधीनस्थ स्तर के अधिकारियों से जांच कराने का क्या औचित्य है।

उन्होंने डीजीपी से स्पष्ट मांग की है कि स्थानीय स्तर के अधिकारियों से जांच न कराकर किसी वरिष्ठ अथवा सेवानिवृत्त राजपत्रित अधिकारी से जांच कराई जाए, ताकि निष्पक्षता के साथ वास्तविक तथ्यों का सामने आना सुनिश्चित हो सके।

अब सवाल यह है कि 12 साल से जांच और प्रार्थना पत्रों के बीच उलझे इस मामले में डीजीपी कार्यालय कब संज्ञान लेता है और क्या वाकई जांच की कमान किसी निष्पक्ष वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी जाती है?

प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोप प्रार्थी के कथन पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी शेष है।