बारिश और नमी से इंजन के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की होगी सुरक्षा, कानपुर लोको शेड ने शुरू किया अनूठा प्रयोग

कानपुर। भारतीय रेलवे में पहली बार उत्तर मध्य रेलवे के इलेक्ट्रिक लोको शेड कानपुर ने इलेक्ट्रिक इंजन को नमी और बारिश के प्रभाव से बचाने के लिए विशेष रोटरी डेसिकेंट डीह्यूमिडिफायर लगाया है। यह प्रयोग लोकोमोटिव संख्या 44061 में किया गया है। इसका उद्देश्य इंजन के प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ट्रैक्शन कन्वर्टर को नमी से सुरक्षित रखना और उसकी कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखना है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार ट्रैक्शन कन्वर्टर आधुनिक इलेक्ट्रिक इंजन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। मानसून और अधिक नमी वाले मौसम में हवा में मौजूद नमी के कारण इलेक्ट्रॉनिक कार्ड, कनेक्टर और धातु के संपर्कों पर जंग तथा ऑक्सीकरण का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा नमी के कारण धूल-मिट्टी भी उपकरणों पर चिपक सकती है, जिससे विद्युत रिसाव और शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका रहती है।

कानपुर लोको शेड में लगाए गए डीह्यूमिडिफायर का काम इंजन के भीतर मौजूद अतिरिक्त नमी को सोखना है। इससे ट्रैक्शन कन्वर्टर और उससे जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आसपास का वातावरण अपेक्षाकृत शुष्क रहेगा। रेलवे का मानना है कि इससे उपकरणों की सुरक्षा बढ़ेगी और नमी के कारण होने वाली अचानक खराबी की घटनाओं में कमी आ सकती है।

यह पहल उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह की निगरानी और दूरदर्शी सोच से आगे बढ़ाई गई है। वैश्विक स्तर पर संवेदनशील विद्युत उपकरणों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इस तकनीक को भारतीय रेलवे की परिस्थितियों और मौसम के अनुरूप अपनाते हुए पहली बार प्रयोग में लाया गया है।

इस तकनीक के प्रमुख लाभों में इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरणों को जंग से बचाना, नमी के कारण धूल जमने की समस्या कम करना, उपकरणों के इंसुलेशन को लंबे समय तक सुरक्षित रखना तथा शॉर्ट सर्किट और ट्रैक्शन कन्वर्टर में खराबी की आशंका कम करना शामिल है। इससे इंजनों की बार-बार मरम्मत की आवश्यकता में भी कमी आने की उम्मीद है।

फिलहाल डीह्यूमिडिफायर से लैस लोकोमोटिव संख्या 44061 नियमित रूप से परिचालन में है। इसका तीन महीने तक परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण अवधि पूरी होने के बाद इंजन के प्रदर्शन और संबंधित आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। यदि परीक्षण के परिणाम संतोषजनक रहे, तो मानसून और अत्यधिक नमी वाले क्षेत्रों में संचालित अन्य इलेक्ट्रिक इंजनों में भी इस तकनीक को अपनाने पर विचार किया जाएगा।