पूर्वोत्तर में 96 हजार करोड़ की रेल परियोजनाओं को मिल रही रफ्तार इन्फ्राबिल्ड नॉर्थ ईस्ट 2026 में एनएफआर निर्माण के महाप्रबंधक आशीष बंसल ने बताईं प्रमुख उपलब्धियां

गुवाहाटी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण) के महाप्रबंधक आशीष बंसल ने बुधवार को गुवाहाटी में आयोजित ?इन्फ्राबिल्ड नॉर्थ ईस्ट 2026? सम्मेलन में पूर्वोत्तर में चल रही रेलवे की प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं और उनकी प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद पूर्वोत्तर में रेल संपर्क को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निर्माण कार्य जारी हैं।

महाप्रबंधक के अनुसार, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण) के तहत 1,800 किलोमीटर से अधिक लंबी नई लाइन और दोहरीकरण परियोजनाएं चल रही हैं। इन परियोजनाओं की कुल लागत लगभग 96 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से करीब 596 किलोमीटर का कार्य पूरा किया जा चुका है। अगले पांच वर्षों के दौरान विभिन्न परियोजनाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरा कर शुरू करने का व्यापक कार्यक्रम तैयार किया गया है।

उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर में रेल परियोजनाओं का निर्माण सामान्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। कठिन पहाड़ी भूभाग, भारी बारिश, भूस्खलन, भूगर्भीय अनिश्चितताओं, पर्यावरण और भूमि संबंधी मुद्दों तथा सीमित पहुंच जैसी परिस्थितियों के बीच निर्माण कार्य किया जा रहा है। ऐसे में सुरक्षित और मजबूत रेल ढांचे के निर्माण के लिए आधुनिक तकनीक और विशेष इंजीनियरिंग समाधान अपनाए जा रहे हैं।

बैरबी-सायरंग परियोजना पूरी

प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए आशीष बंसल ने बताया कि 51 किलोमीटर लंबी बैरबी-सायरंग नई रेल लाइन का काम पूरा हो चुका है। इस परियोजना के माध्यम से मिजोरम की राजधानी के निकट स्थित सायरंग को रेल संपर्क उपलब्ध कराया गया है। पहाड़ी क्षेत्र में इस लाइन का निर्माण बड़ी संख्या में सुरंगों और पुलों के जरिए किया गया है।

अररिया-गलगलिया और अन्य परियोजनाओं में भी प्रगति

111 किलोमीटर लंबी अररिया-गलगलिया नई रेल लाइन को 11 जुलाई 2025 को पूरी तरह चालू कर दिया गया। वहीं डिमापुर-कोहिमा नई रेल लाइन के धनसिरी-शोखुव और शोखुवा-मॉलवॉम खंड पहले ही चालू किए जा चुके हैं। करीब 14 किलोमीटर लंबे मॉलवॉम-फेरिमा खंड को मार्च 2027 तक चालू करने का लक्ष्य है।

रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 111 किलोमीटर लंबी जिरिबाम-इंफाल नई रेल लाइन के 55 किलोमीटर से अधिक हिस्से को विभिन्न चरणों में शुरू किया जा चुका है। इसके अगले 9.10 किलोमीटर लंबे खोंगसांग-अवांगखुल खंड को अक्टूबर 2026 में चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

दोहरीकरण परियोजनाओं के तहत कटिहार-कुरेठा के 11 किलोमीटर और कटिहार-सोनौली के 17 किलोमीटर खंड को 19 जून 2026 को चालू किया गया।

आधुनिक तकनीक से होगा निर्माण

सम्मेलन में महाप्रबंधक ने बताया कि पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण) के तहत 69 सर्वेक्षण विभिन्न चरणों में चल रहे हैं। निर्माण कार्यों में नई तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। सुरंग निर्माण में नई ऑस्ट्रियन टनलिंग पद्धति, भूवैज्ञानिक मानचित्रण, इंस्ट्रूमेंटेशन, यंत्रीकृत निर्माण, ड्रोन, जीएनएसएस, जीआईएस, भवन सूचना प्रतिरूपण और डिजिटल परियोजना निगरानी जैसी तकनीकों को अपनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में भविष्य की रेल अवसंरचना को इस तरह विकसित करने की जरूरत है, जो अत्यधिक बारिश और प्रतिकूल मौसम जैसी परिस्थितियों का सामना कर सके और पर्यावरण पर भी कम से कम प्रभाव डाले।

आशीष बंसल ने कहा कि कठिन भूभाग में रेल परियोजनाओं के निर्माण से पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण) को व्यापक तकनीकी और संस्थागत अनुभव मिला है। आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों और सुरक्षा मानकों के साथ परियोजनाओं को निर्धारित समय और लागत के दायरे में पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे पूर्वोत्तर में रेल संपर्क मजबूत होने के साथ क्षेत्र के समग्र सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी।