एटा: राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के बयान से क्षुब्ध होकर जिला महामंत्री डॉ. जगदीश मिश्रा ने लोजपा से दिया इस्तीफा।

*एटा: राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के बयान से क्षुब्ध जिला महामंत्री डॉ जगदीश मिश्रा ने लोजपा से दिया इस्तीफा।*

जातीय नहीं आर्थिक आरक्षण हो लागू - डॉ. मिश्रा�

जलेसर। लोक जनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान के जातीय आरक्षण संबंधी बयान से आहत होकर पार्टी के युवा जिला महामंत्री डॉ जगदीश प्रसाद मिश्रा ने संगठन की सदस्यता एवं जिला महामंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। डॉ �मिश्र ने बताया कि वह जातीय आरक्षण के बजाय आर्थिक आरक्षण के समर्थक हैं। जातीय आरक्षण पूरी तरह से खत्म होना चाहिए।
लोकजन शक्ति पार्टी के जिला महामंत्री पद से इस्तीफा देने वाले डॉ जगदीश प्रसाद मिश्रा ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान द्वारा पिछले दिनों एक बयान दिया था जिसमें कहा गया था कि जातीय आरक्षण कोई खैरात नहीं है, हमारा अधिकार है, इस पर कोई चर्चा नहीं होगी। इससे आहत होकर उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) युवा आगरा के जिला महामंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया है।�
डॉ मिश्र ने कहा कि बाबा साहब ने आरक्षण केवल 10 वर्ष तक देने की बात कही थी। लेकिन संसद में बैठे नेता केवल अपने फायदा के लिए इसे फिर आगे बढ़ा लेते हैं।एक अनुसूचित जाति के मंत्री का बेटा आरक्षण का लाभ ले रहा है। इसी प्रकार सांसद विधायक तथा आई ए एस,आई पी एस के बच्चे आरक्षण का लाभ ले रहे हैं। जबकि अनुसूचित जाति के ही एक मजदूर ,गरीब किसान के बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है। आर्थिक आधार पर आरक्षण से अनुसूचित जाति के मंत्री, सांसद,विधायक तथा अधिकारी के बच्चे आरक्षण का लाभ नहीं उठा पायेंगे। इसीलिए ये सब आरक्षण की वकालत करते हैं।देश में समानता के लिए आरक्षण का हटना आवश्यक है।

डॉ मिश्रा ने कहा कि आज आरक्षण हटाओ अभियान देश में शुरू हो चुका है।दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की पुलिस द्वारा युवाओं पर जो लाठी चार्ज किया गया। मैं उसका पुरजोर विरोध करता हूं । मैं आरक्षण हटाओ अभियान के लोगों के साथ हूं। मैं जातिगत आरक्षण का विरोध करता हूं । आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए क्योंकि सवर्णों में भी गरीब हैं। उन्हें आरक्षण की जरूरत है। मैं संकट के समय में अपने सवर्ण समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हूँ।
� � विदित हो कि 90 के दशक में मंडल कमीशन के विरोध में 3 सितंबर 1990 को श्री लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विद्यापीठ कटवारिया सराय नई दिल्ली के शोध छात्र नेता जगदीश प्रसाद मिश्र ने सर्वप्रथम आत्मदाह किया था, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए डॉ मिश्र को बचा लिया था और देखते ही देखते पूरे देश में आरक्षण के विरोध की लहर फैल गई थी।


रिपोर्ट: रमेश जादौन एटा।