* पूजा के साथ शिव संदेश अपनाने से होगा कल्याण :- राजेश्वरानंद *

दिल्ली, 12 अगस्त: "शिव पर केवल जलाभिषेक करने से ही पूर्ण कल्याण संभव नहीं है, बल्कि शिव के संदेशों और विचारों को अपने जीवन में उतारने से ही वास्तविक कल्याण और शांति प्राप्त हो सकती है।" यह विचार पूज्य स्वामी श्री राजेश्वरानंद राजगुरु जी महाराज ने अनारकली गार्डन, जगतपुरी स्थित श्री राज माता जी मंदिर में सावन शिवरात्रि एवं अमावस्या के पावन अवसर पर आयोजित शिव परिवार स्थापना व अनुष्ठान के दौरान भक्तों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

सतगुरु राज दरबार के प्रबंधक श्री राम वोहरा ने बताया कि सावन शिवरात्रि के पावन अवसर पर स्वामी श्री राजेश्वरानंद " राज गुरु" जी महाराज के दिव्य सानिध्य में श्री ओम प्रकाश वर्मा एवं उनके परिवार द्वारा शिव परिवार की स्थापना का धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया।

इस अनुष्ठान के अंतर्गत प्रथम चरण में शिव परिवार की प्रतिमाओं को पाँच विभिन्न अधिवासों?अन्नवास, फलवास, पुष्पवास, जलवास एवं शयनवास सम्पन्न कराया गया। इसके उपरांत विधिवत पूजा-पाठ, जप एवं हवन-यज्ञ संपन्न हुआ। तत्पश्चात जगतपुरी मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में नगर परिक्रमा निकाली गई। शिवरात्रि के दिन एक ओर जहाँ श्रद्धालुओं द्वारा निरंतर जलाभिषेक चलता रहा, वहीं दूसरी ओर अनुष्ठान के समापन पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसके अतिरिक्त, सावन अमावस्या के अवसर पर पितरों के निमित्त एक विशेष भंडारा भी आयोजित किया गया।

भक्तों को संबोधित करते हुए स्वामी श्री राजेश्वरानंद जी महाराज ने कहा, "शिव परिवार की स्थापना भौतिक रूप से किसी मंदिर में तो की जा सकती है, लेकिन जब तक शिव के विचारों की स्थापना हमारी बुद्धि में नहीं होगी, तब तक केवल जल अर्पित करने से परम कल्याण नहीं हो सकता। जल चढ़ाने और उपासना करने से भोले भंडारी आपको सभी भौतिक सुख-सुविधाएं दे सकते हैं, लेकिन विचार कीजिए?क्या सब कुछ मिल जाने के बाद भी मन को सच्ची शांति मिल पाती है? जिनके पास धन, संपत्ति, पुत्र-पौत्र, कोठी, बंगला और गाड़ियाँ हैं, क्या वे पूरी तरह प्रसन्न और शांत हैं? उत्तर है?नहीं।"

स्वामी जी ने आगे कहा, "भगवान शंकर का वास्तविक संदेश सेवा, सिमरन और सत्संग को जीवन में उतारना है। इससे न केवल आंतरिक शांति मिलती है, बल्कि पूरे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है। भगवान शिव का संदेश है कि जिसकी ज़रूरतें न्यूनतम यानी कम से कम हो और जिसके विचार उच्चतम हैं, वही मनुष्य जीवन में सच्ची शांति और वास्तविक प्रगति को प्राप्त करता है।"

भगवान शिव के आदर्शों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शंकर स्वयं श्मशान में वास करते हैं, फिर भी उन्होंने पवित्र गंगा मैया को अपनी जटाओं में स्थान दिया। समुद्र मंथन के समय देवताओं और असुरों की रक्षा हेतु उन्होंने स्वयं विषपान किया। जब महाकाली अत्यधिक क्रोधित हुईं, तो संसार के कल्याण के लिए भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गए। शिव का यही त्याग, समभाव और करुणा का संदेश हमें अपने व्यावहारिक जीवन में अपनाना चाहिए।

शिव परिवार एवं सदगुरु देव की आरती एवं सर्वकल्याण अरदास के साथ ही अनुष्ठान सम्पन्न हुआ।

राम वोहरा 9212315006