आईएमए की जनरल बॉडी मीटिंग एवं सीएमई का सफल आयोजन, विशेषज्ञों ने साझा की चिकित्सा क्षेत्र की नवीनतम जानकारी

मुरादाबाद। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की ओर से रविवार रात ओरिकल आई हॉस्पिटल के कॉन्फ्रेंस हॉल में जनरल बॉडी मीटिंग (जीबीएम) एवं सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने भाग लिया और चिकित्सा विज्ञान की नवीनतम तकनीकों एवं उपचार पद्धतियों पर विशेषज्ञों के विचार सुने।

बैठक के दौरान आगामी आईएमए चुनावों के सुचारु संचालन के लिए निर्वाचन समिति का गठन किया गया। समिति में वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राजेश सिंह को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया, जबकि डॉ. अर्चना अग्रवाल और डॉ. बी.एस. लोचब को सदस्य बनाया गया।

सीएमई कार्यक्रम में विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों ने अपने-अपने विषयों पर व्याख्यान देते हुए चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे नए शोध और आधुनिक उपचार पद्धतियों की जानकारी साझा की।

वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. बी.के. दत्त ने बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए समय पर टीकाकरण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नियमित टीकाकरण कई गंभीर बीमारियों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है और प्रत्येक आयु वर्ग के लिए अद्यतन वैक्सीनेशन की जानकारी चिकित्सकों के लिए आवश्यक है।

ओरिकल आई हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. गिरिजेश केन ने ड्राई आई डिजीज की आधुनिक जांच तकनीकों और प्रभावी उपचार के बारे में जानकारी दी। वहीं, जिज्ञासा हॉस्पिटल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. करिश्मा सिंह ने प्रसव के बाद होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हेमरेज) की समय पर पहचान और उपचार के महत्व पर जोर दिया।

वरिष्ठ गैस्ट्रो सर्जन डॉ. राहुल कुमार ने पेट संबंधी रोगों में दिखाई देने वाले रेड फ्लैग संकेतों की पहचान, उनके संभावित कारणों तथा समय पर जांच एवं उपचार की आवश्यकता पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में आईएमए के सभी पदाधिकारी एवं सदस्य चिकित्सक उपस्थित रहे। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के व्याख्यानों को अत्यंत ज्ञानवर्धक और व्यावहारिक बताते हुए ऐसे आयोजनों को चिकित्सा क्षेत्र में निरंतर सीखने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

आईएमए के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य चिकित्सकों को चिकित्सा विज्ञान में हो रहे नवीनतम शोध, तकनीकों और उपचार पद्धतियों से अवगत कराना तथा सतत चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित करना था।