दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का अभिनव प्रयोग, अब बिना बारिश के होगी रेल कोचों में पानी रिसाव की जांच

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे का अभिनव प्रयोग, अब बिना बारिश के होगी रेल कोचों में पानी रिसाव की जांच

बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर कोचिंग डिपो ने रेल कोचों में वर्षा जल के रिसाव की जांच के लिए स्वदेशी 'रेन वाटर इन्ग्रेस टेस्ट बेंच' विकसित किया है। इस अभिनव तकनीक से अब प्राकृतिक बारिश का इंतजार किए बिना कृत्रिम वर्षा के माध्यम से कोचों की छत, खिड़कियों, साइड पैनलों और अन्य हिस्सों में पानी के रिसाव की जांच की जा सकेगी।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पहले जल रिसाव की पहचान मुख्य रूप से बारिश के मौसम पर निर्भर रहती थी, जिससे पूरे वर्ष परीक्षण संभव नहीं हो पाता था। इस समस्या के समाधान के लिए बिलासपुर कोचिंग डिपो के अधिकारियों और कर्मचारियों ने अधिकांशतः स्क्रैप सामग्री का उपयोग कर कम लागत में यह टेस्ट बेंच तैयार किया है। केवल आवश्यक पुर्जे ही बाजार से खरीदे गए हैं।

यह पोर्टेबल प्रणाली वर्षभर कृत्रिम वर्षा परीक्षण की सुविधा उपलब्ध कराएगी, जिससे कोचों में छिपे रिसाव की समय रहते पहचान कर उसे दूर किया जा सकेगा। इससे मानसून के दौरान यात्रियों को पानी टपकने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी, कोचों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा रखरखाव की लागत भी कम होगी। इस टेस्ट बेंच का उपयोग पारंपरिक रेल कोचों के साथ-साथ वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनों में भी किया जा सकेगा।

रेलवे का मानना है कि यह स्वदेशी नवाचार कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता और संसाधनों के बेहतर उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो यात्रियों को अधिक सुरक्षित, आरामदायक और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।