घोषणा ₹1500 पेंशन की, भुगतान ₹1000 का — विभागीय लापरवाही का आरोप, मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांगजन पेंशन को ₹1000 से बढ़ाकर ₹1500 प्रतिमाह किए जाने की घोषणा, माननीय वित्त मंत्री द्वारा विधानसभा में किए गए उल्लेख तथा सरकार के आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यमों पर हुए प्रचार-प्रसार के बावजूद जुलाई माह में बड़ी संख्या में लाभार्थियों को केवल ₹1000 पेंशन मिलने पर दिव्यांग समाज में नाराजगी बढ़ गई है।

राष्ट्रीय युवा संसद के प्रतिभागी सूर्यदेव सिंह सोमवंशी ने इस मामले में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने पेंशन वृद्धि की घोषणा कर दी थी और उसका सार्वजनिक प्रचार भी किया गया, तो उसका लाभ समय पर लाभार्थियों तक न पहुंचना विभागीय स्तर पर गंभीर चूक को दर्शाता है।सोमवंशी ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी सरकार की घोषित मंशा और निर्णयों के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण दिव्यांगजनों को घोषित लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा प्रदेश के लाखों दिव्यांगजन भुगत रहे हैं, जिनके लिए पेंशन जीवनयापन, दवा, उपचार और दैनिक आवश्यकताओं का महत्वपूर्ण सहारा है।उन्होंने कहा कि यदि सरकार की घोषणा के बावजूद उसका क्रियान्वयन समय पर नहीं हो रहा है, तो इससे जनता के बीच भ्रम और असंतोष पैदा होता है। उनके अनुसार, प्रशासनिक तंत्र की जिम्मेदारी है कि सरकार के निर्णयों को प्रभावी और समयबद्ध ढंग से लागू करे।

सूर्यदेव सिंह सोमवंशी ने माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी से इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय समीक्षा कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या विलंब हुआ है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जुलाई माह से घोषित ₹1500 प्रतिमाह पेंशन का लाभ तत्काल सभी पात्र दिव्यांगजनों तक पहुंचाया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि ₹500 प्रति माह की अंतर राशि शीघ्र लाभार्थियों के खातों में भेजी जाए।

सोमवंशी ने कहा कि दिव्यांगजनों के सम्मान और अधिकारों से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सरकार और प्रशासन दोनों की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो, इसके लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।