रेल मंत्री को भेजे एक ई-मेल ने बचाई रेलवे की ऐतिहासिक धरोहर, अहमदाबाद में ‘प्रगति’ स्टीम इंजन का हुआ संरक्षण

एक साधारण ई-मेल से शुरू हुई पहल अब भारतीय रेल की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की मिसाल बन गई है। कॉन्सेप्ट्स इनोवेटिव के प्रोपराइटर टी. के. रवीन्द्रन ने 1 दिसंबर 2025 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को ई-मेल भेजकर अपनी अभिनव मल्टीबॉन्ड कोटिंग तकनीक को भारतीय रेलवे में उपयोग करने का प्रस्ताव दिया था। इस प्रस्ताव में रेलवे कोचों और धातु संरचनाओं को जलरोधी, जंगरोधी सुरक्षा, तापमान नियंत्रण और ऊर्जा दक्षता से जुड़ी तकनीकी सुविधाएं देने की बात कही गई थी।

रेल मंत्री द्वारा प्रस्ताव पर संज्ञान लेने के बाद पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल में मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने इस तकनीक के परीक्षण के निर्देश दिए। परीक्षण के लिए अहमदाबाद मंडल कार्यालय परिसर में स्थापित ऐतिहासिक स्टीम इंजन ?प्रगति? का चयन किया गया। यह इंजन जेडी क्लास मीटर गेज स्टीम लोकोमोटिव संख्या 548 है, जो भारतीय रेल की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

वर्ष 1957 में जापान की कंपनी निप्पॉनश्रेयो द्वारा निर्मित ?प्रगति? स्टीम इंजन वर्ष 2008 से अहमदाबाद मंडल के डीआरएम कार्यालय परिसर में प्रदर्शित किया जा रहा है। लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने के कारण इंजन पर जंग, धूप, बारिश और अन्य पर्यावरणीय प्रभावों के निशान दिखाई देने लगे थे। इसके संरक्षण और सौंदर्यीकरण के लिए मल्टीबॉन्ड कोटिंग तकनीक का प्रयोग किया गया।

कंपनी के अनुसार मल्टीबॉन्ड एक विशेष सुरक्षात्मक कोटिंग तकनीक है, जो धातु संरचनाओं को जंग, नमी, फफूंद और मौसम के दुष्प्रभावों से बचाने के साथ-साथ तापमान कम करने, लीकेज रोकने, ऊर्जा बचाने और सतह को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करती है। इसका उपयोग रेलवे के अलावा पुलों, औद्योगिक इकाइयों, जल टंकियों, भवनों और अन्य धातु व कंक्रीट संरचनाओं में भी किया जा सकता है।

कंपनी का दावा है कि वह पिछले एक दशक से इस तकनीक पर कार्य कर रही है और कई सरकारी व निजी संस्थानों में इसके सकारात्मक परिणाम मिल चुके हैं। कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में ब्रह्माकुमारी संस्थान, वडोदरा पुलिस आयुक्त कार्यालय, वडोदरा सेंट्रल जेल, एवीटी ग्रुप और अन्य प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं।

अहमदाबाद में ऐतिहासिक ?प्रगति? स्टीम इंजन पर किया गया यह संरक्षण कार्य भारतीय रेल की विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहल दर्शाती है कि नवाचार, स्वदेशी तकनीक और प्रशासनिक सहयोग के माध्यम से रेलवे की ऐतिहासिक धरोहरों को आधुनिक और टिकाऊ तरीके से संरक्षित किया जा सकता है।