मंडी व्यापार लाइसेंस के नवीनीकरण में दो जमानतदार अनिवार्य नहीं, आजीवन लाइसेंस पर भी नहीं रोक मंडी परिषद मुख्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा के नेतृत्व में व्यापारियों ने उठाए मुद्दे

लखनऊ। मंडी व्यापार लाइसेंस के नवीनीकरण में दो जमानतदारों की अनिवार्यता और आजीवन लाइसेंस को लेकर व्याप्त भ्रम गुरुवार को राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद मुख्यालय में दूर हो गया। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा के नेतृत्व में व्यापारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मंडी निदेशक इंद्र विक्रम सिंह से भेंट कर लाइसेंस नवीनीकरण की नई शर्तों, जमानतदारों के शपथ पत्र, मंडी समिति की दुकान आवंटन प्रक्रिया, लाइसेंसधारियों को पार्टनरशिप बनाने की अनुमति, मंडी परिसर की दुकानों के मालिकाना हक, प्रस्तावित नई ऐप टैगिंग व्यवस्था, ऑनलाइन पोर्टल एवं ऐप की तकनीकी खामियों, दुकानों के किराये में वृद्धि तथा मंडी शुल्क 0.5 प्रतिशत किए जाने सहित विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।

प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा ने मंडी व्यापार लाइसेंस नवीनीकरण की नई व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि नवीनीकरण के दौरान दो जमानतदारों के शपथ पत्र मांगे जा रहे हैं, जबकि व्यापारी पहले ही लाइसेंस के लिए जमानत जमा कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मंडी परिषद की ओर से दो जमानतदार अनिवार्य किए जाने का कोई आदेश ही जारी नहीं किया गया है और व्यापारी अपनी इच्छा से आजीवन लाइसेंस बनवा सकते हैं, तो प्रदेश की विभिन्न मंडी समितियां व्यापारियों से अनावश्यक रूप से दो जमानतदारों के शपथ पत्र भरवाकर उन्हें क्यों परेशान कर रही हैं। इस पर मंडी निदेशक इंद्र विक्रम सिंह ने स्पष्ट किया कि मंडी परिषद की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है। केवल उन्हीं मामलों में दोबारा जमानत ली जाएगी, जिनमें पूर्व जमानतदार अब उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन पोर्टल पर लाइसेंस नवीनीकरण के लिए दो विकल्प उपलब्ध हैं। जिन लाइसेंसों में पहले से जमानतदार हैं, उनका नवीनीकरण उसी आधार पर होगा, जबकि जमानतदार नहीं होने की स्थिति में एक लाख रुपये की एफडीआर के आधार पर भी लाइसेंस का नवीनीकरण कराया जा सकेगा।
प्रतिनिधिमंडल ने यह मुद्दा भी उठाया कि व्यापारी की इच्छा के अनुसार लाइसेंस का नवीनीकरण एक वर्ष, पांच वर्ष अथवा आजीवन अवधि के लिए किया जाना चाहिए। इस पर मंडी निदेशक ने स्पष्ट किया कि व्यापारी अपनी इच्छा के अनुसार आजीवन लाइसेंस बनवा सकता है और इस संबंध में मंडी स्तर पर कोई रोक नहीं है।

व्यापारियों ने मंडी समिति की दुकान आवंटन प्रक्रिया, लाइसेंसधारियों को पार्टनरशिप बनाने की अनुमति, मंडी परिसर की दुकानों के मालिकाना हक, प्रस्तावित नई ऐप टैगिंग व्यवस्था, ऐप में व्याप्त खामियों को दूर करने, दुकानों के किराये में प्रतिवर्ष पांच प्रतिशत वृद्धि के स्थान पर प्रवार्षिक वृद्धि लागू करने तथा मंडी शुल्क 0.5 प्रतिशत किए जाने की मांग भी उठाई। इस पर मंडी निदेशक ने कहा कि व्यापारियों के सुझावों पर गंभीरता से विचार करते हुए आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने वीडियो प्रस्तुति के माध्यम से प्रस्तावित ऐप टैगिंग व्यवस्था की जानकारी दी और व्यापारियों की शंकाओं का समाधान किया।

बैठक में प्रदेश महामंत्री एवं राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य राजेंद्र गुप्ता ने ऑनलाइन पोर्टल एवं मंडी ऐप में मौजूद तकनीकी खामियों की ओर मंडी निदेशक का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि अधिकांश व्यापारी तकनीकी रूप से प्रशिक्षित नहीं हैं। इस पर मंडी निदेशक ने सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल प्रशिक्षण शिविर आयोजित करे। उन्होंने आश्वासन दिया कि मंडी परिषद मुख्यालय से अधिकारियों को भेजकर व्यापारियों को प्रशिक्षित कराया जाएगा।

बैठक में प्रदेश अध्यक्ष मुकुंद मिश्रा, चेयरमैन महेंद्र जैन 'मयूर', राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के सदस्य एवं प्रदेश महामंत्री राजेंद्र गुप्ता, सुनील पांडेय, प्रदेश युवा महामंत्री योगेंद्र सिंह, प्रदेश सह-कोषाध्यक्ष धर्मपाल अग्रवाल, प्रदेश संगठन मंत्री श्याम मिश्रा, कानपुर के महामंत्री कृपा शंकर त्रिवेदी, अतीत राय, झांसी के अमन अग्रवाल, सतीश राय, निखिल उपाध्याय सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए व्यापारियों ने भाग लिया।