धूमधाम के साथ सम्पन्न राधा प्रसाद देव जू महाराज का 62 वा वैराग्य महोत्सव

आम के बंगले में विराजे ठाकुर राधा ललित बिहारी जू महाराज

आश्रम परिसर में हुआ भंडारे और भजन संध्या का आयोजन

वृंदावन । धर्मनगरी वृंदावन के परिक्रमा मार्ग स्थित प्रतिष्ठित ललित कुंज आश्रम में हरिदासीय संप्रदाय के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी राधा प्रसाद देव जू महाराज का 62वां वैराग्य महोत्सव आश्रम के अनुयायियों और भक्तों द्वारा बड़े ही हर्षोल्लास एवं श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर आश्रम परिसर को भव्य रूप से सजाया गया था, जहाँ दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, संकीर्तन और साधु-सेवा का दौर चलता रहा।

आठ वर्ष की अल्पायु में किया था गृह त्याग

उत्सव के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए आश्रम के महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज ने बताया कि पूज्य स्वामी राधा प्रसाद देव जू महाराज का जीवन उच्च कोटि के त्याग और वैराग्य का साक्षात प्रतीक है। महाराज श्री ने आज ही के दिन, आज से ठीक 62 वर्ष पूर्व मात्र 8 वर्ष की अल्पायु में सांसारिक जीवन और घर का परित्याग कर दिया था। इतनी छोटी उम्र में वैराग्य धारण कर उन्होंने वृंदावन वास किया और हरिदासीय संप्रदाय की सुदृढ़ परंपरा को आगे बढ़ाया। उनका संपूर्ण जीवन राधा-कृष्ण की भक्ति और समाज के आध्यात्मिक कल्याण के लिए समर्पित रहा है।

90 ग्रंथों की रचना, मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने किया विमोचन

महंत मोहिनी बिहारी शरण महाराज ने महाराज श्री के साहित्यिक और आध्यात्मिक अवदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वे न केवल एक उच्च कोटि के संत हैं, बल्कि प्रखर विद्वान भी हैं। महाराज श्री द्वारा अब तक करीब 90 पवित्र ग्रंथों की रचना की जा चुकी है। इन ग्रंथों में हरिदासीय संप्रदाय के सिद्धांतों, ब्रज के भक्ति दर्शन और रस साधना की अत्यंत सरल व मार्मिक व्याख्या की गई है। समय-समय पर इन महान ग्रंथों की महत्ता को देखते हुए देश के विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों तथा मुख्यमंत्रियों द्वारा इनका विमोचन किया जा चुका है। उनका यह साहित्य आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करता रहेगा।

ठाकुर जी का सजा आम का भव्य बंगला और हुआ झरा भंडारा

इस ऐतिहासिक और पावन मौके पर श्री ललित कुंज आश्रम के गर्भगृह में विराजमान ठाकुर जी के समक्ष आम का भव्य और दिव्य बंगला सजाया गया। रसीले आमों से सजे ठाकुर जी के इस अनूठे स्वरूप के दर्शन पाने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इसके साथ ही, उत्सव के पावन उपलक्ष्य में वृंदावन के विरक्त साधु-वैष्णवों के लिए एक विशाल 'झरा भंडारे' का आयोजन किया गया। भंडारे में सैकड़ों संतों ने प्रसाद ग्रहण कर आश्रम और महाराज श्री को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। संतों की सेवा को हरिदासीय परंपरा में सर्वोपरि माना गया है।

भव्य भजन संध्या से रसमय हुआ वातावरण

शाम के समय मंदिर परिसर में एक भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया। भजन संध्या में ब्रज के सुप्रसिद्ध गायकों ने स्वामी हरिदास जी के पदों और ठाकुर जी के मधुर भजनों की ऐसी तान छेड़ी कि उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने उठे। संपूर्ण आश्रम परिसर राधा नाम के जयकारों और भक्ति संगीत से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम के अंत में महामंडलेश्वर राधा प्रसाद देव जू महाराज की आरती उतारी गई और भक्तों ने उनके चरण रज लेकर जीवन को कृतार्थ किया। इस अवसर पर महामंडलेश्वर सत्यानन्द सरस्वती गिरी महाराज, महामंडलेश्वर कृष्णानंद महाराज, महंत अचल बिहारी दास, महंत वैष्णव दास, महंत राम दास, बिहारी लाल वशिष्ठ, आचार्य मनोज मोहन शास्त्री, आचार्य मृदुलकांत शास्त्री, आचार्य बद्रीश, सौरभ गौड़, योगेश गर्ग, हनी मित्तलज यश मित्तल, आयुष मित्तल, सोनू सैनी, डॉ.तनुजा आदि गणमान्य मौजूद रहे।