करीब 100 साल बाद फिर शुरू हुई ऐतिहासिक कादियां-ब्यास रेल परियोजना, पंजाब में विकास को मिलेगी नई रफ्तार

करीब 100 साल बाद फिर शुरू हुई ऐतिहासिक कादियां-ब्यास रेल परियोजना, पंजाब में विकास को मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली। पंजाब के माझा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक और बड़ी सौगात के रूप में केंद्र सरकार ने लंबे समय से लंबित कादियां-ब्यास नई रेल लाइन परियोजना को दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है। रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने गुरुवार को रेल भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार जताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पंजाब में रेलवे ढांचे को मजबूत करने और क्षेत्रीय विकास को तेज गति देने के लिए लगातार काम कर रही है।

रवनीत सिंह बिट्टू ने बताया कि प्रस्तावित नई रेल लाइन पंजाब के गुरदासपुर जिले के कादियां को अमृतसर जिले के ब्यास से जोड़ेगी। लगभग 39.68 किलोमीटर लंबी इस नई बड़ी रेल लाइन के निर्माण पर करीब 1400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस परियोजना का निर्माण कार्य उत्तरी रेलवे द्वारा किया जाएगा। यह रेल मार्ग कादियां, धपाई, घुमान, बुटाला, सठियाला और ब्यास जैसे कई महत्वपूर्ण कस्बों और गांवों से होकर गुजरेगा। इससे माझा क्षेत्र के कई इलाकों को पहली बार सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा और लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी।

परियोजना के तहत अत्याधुनिक रेलवे ढांचा तैयार किया जाएगा, जिसमें घुमान और बुटाला में दो क्रॉसिंग स्टेशन, 11 बड़े पुल, 121 छोटे पुल, 54 सड़क अंडर ब्रिज, आधुनिक सिग्नल और दूरसंचार व्यवस्था के साथ भारत की स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली कवच भी लगाई जाएगी।

मंत्री ने बताया कि इस रेल परियोजना की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी। वर्ष 1928-29 में तत्कालीन रेलवे प्रशासन ने इसे मंजूरी दी थी और 1930 के दशक में निर्माण कार्य का बड़ा हिस्सा पूरा भी कर लिया गया था, लेकिन बाद में परिस्थितियों और बदलती प्राथमिकताओं के कारण यह योजना बंद हो गई। बाद में इसके महत्व को देखते हुए इसे फिर से सामाजिक रूप से जरूरी रेल परियोजना के रूप में शामिल किया गया, लेकिन कई कारणों से काम आगे नहीं बढ़ सका। अब करीब 1400 करोड़ रुपये की संशोधित योजना तैयार कर इसे फिर गति दी गई है।

उन्होंने कहा कि यह रेल लाइन केवल क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत नहीं करेगी, बल्कि आपात स्थिति में अमृतसर-पठानकोट रेलखंड के वैकल्पिक मार्ग के रूप में भी काम करेगी, जिससे उत्तर भारत में रेल संचालन और अधिक मजबूत होगा। परियोजना से किसानों को अपनी फसलों के बेहतर बाजार मिलेंगे, परिवहन सुविधाएं मजबूत होंगी, व्यापार और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तथा निर्माण और संचालन के दौरान रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

इस रेल परियोजना से धार्मिक पर्यटन को भी बड़ा लाभ मिलेगा। कादियां, ब्यास, डेरा बाबा नानक, घुमान समेत कई धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी।

अंत में रवनीत सिंह बिट्टू ने कादियां, ब्यास, घुमान, बुटाला, सठियाला और पूरे माझा क्षेत्र के लोगों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार सभी जरूरी मंजूरियां जल्द पूरी कर इस परियोजना को तय समय में पूरा करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।