श्री जगन्नाथ रथोत्सव 2026 की तैयारियां प्रारंभ, विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तय

रायगढ़, 17 जून। आगामी श्री जगन्नाथ रथोत्सव 2026 के सफल आयोजन हेतु श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा रविवार, 14 जून 2026 को संध्या समय श्री जगन्नाथ मंदिर परिसर में एक महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई। बैठक में ट्रस्ट के ट्रस्टीगण, कार्यकर्तागण, उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति, उत्कलिका, स्पोर्ट्स समिति तथा पं. भवानी शंकर षड़ंगी विद्यालय के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

बैठक में 29 जून को आयोजित होने वाली देवस्नान पूर्णिमा से लेकर 25 जुलाई की हरिशयन एकादशी तक होने वाले समस्त धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा कर आवश्यक जिम्मेदारियां निर्धारित की गईं।

बैठक की जानकारी देते हुए दिनेश कुमार षड़ंगी प्रबंधन ट्रस्टी श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट ने बताया कि 29 जून को देवस्नान पूर्णिमा के अवसर पर महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं माता सुभद्रा के दिव्य स्नान के पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर विशेष रूप से पुरी से आमंत्रित कारीगरों द्वारा श्रीमंदिर पुरी की परंपरा के अनुरूप महाप्रसाद तैयार किया जाएगा। संध्या समय ओडिसी नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुति भी आयोजित की जाएगी। इसके पश्चात महाप्रभु 15 दिनों के लिए अनसर गृह में विराजमान रहेंगे, जहां उनकी विभिन्न गुप्त सेवाएं एवं स्वास्थ्य लाभ संबंधी परंपरागत अनुष्ठान संपन्न होंगे।

14 जुलाई को नेत्रोत्सव एवं नवयौवन दर्शन का आयोजन किया जाएगा। इस दिन महाप्रभु अनसर गृह से बाहर पधारेंगे तथा पुष्प श्रृंगार के साथ श्रद्धालुओं को नवयौवन दर्शन प्रदान करेंगे। भगवान को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा।

16 जुलाई को रथयात्रा महोत्सव का शुभारंभ पारंपरिक पहंडी विधि से होगा। रायगढ़ राजपरिवार द्वारा छेरा पहरा की परंपरा का निर्वहन करते हुए महाप्रभु को रथ पर विराजमान कराया जाएगा।

17 जुलाई को गुंडिचा यात्रा एवं नगर भ्रमण निकाला जाएगा, जो मोतीमहल से प्रारंभ होकर चांदनी चौक, सोनारपारा होते हुए गांजा चौक स्थित मौसी घर तक पहुंचेगा।

24 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा (वापसी रथयात्रा) गांजा चौक से प्रारंभ होकर हटरी चौक, गद्दी चौक, पैलेस रोड तथा चांदनी चौक मार्ग से पुनः श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचेगी।

25 जुलाई को सोनाभेष एवं हरिशयन एकादशी का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ का स्वर्णाभूषणों, पाट वस्त्रों एवं दिव्य आयुधों से भव्य श्रृंगार किया जाएगा। विशेष परंपरा के अनुसार केवल रसगुल्ले का भोग अर्पित किया जाएगा। तत्पश्चात महाप्रभु चार माह के शयन काल में प्रवेश करेंगे। सनातन परंपरा के अनुसार इस अवधि में विवाह सहित अन्य शुभ कार्य स्थगित रहते हैं।

बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म में प्रत्येक शुभ कार्य का प्रारंभ भगवान विष्णु के आवाहन से होता है। इसलिए हरिशयन एकादशी से देवउठनी एकादशी तक का काल धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर भगवान के जागरण के साथ ही पुनः सभी मांगलिक एवं शुभ कार्य प्रारंभ होते हैं।

जारीकर्ता :

आकाश कुमार मिश्रा, अधिवक्ता

मीडिया प्रभारी

उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति, रायगढ़ (छ.ग.)