नसरथा ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों में अनियमितता के आरोप,मस्टरोल में 70 मजदूर दर्ज, मौके पर कम संख्या मिलने का दावा

नसरथा ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों में अनियमितता के आरोप,मस्टरोल में 70 मजदूर दर्ज, मौके पर कम संख्या मिलने का दावा


चकिया। चकिया ब्लॉक की नसरथा ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में संचालित मनरेगा कार्यों में वास्तविक श्रमिकों की संख्या और मस्टरोल में दर्ज उपस्थिति के बीच भारी अंतर है। लोगों का दावा है कि अभिलेखों में 70 मजदूरों की उपस्थिति दिखाई गई है, जबकि कार्यस्थल पर इतने श्रमिक मौजूद नहीं मिले।


ऑनलाइन मस्टरोल और फोटो अपलोडिंग पर उठे सवाल
एक ही फोटो के बार-बार उपयोग का आरोप


ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मनरेगा के ऑनलाइन रिकॉर्ड में कुछ मजदूरों की तस्वीरों का उपयोग एक से अधिक बार किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि तकनीकी और भौतिक सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।


ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि रिकॉर्ड और वास्तविकता में अंतर पाया जाता है तो इससे योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।


अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने का आरोप


कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने बीडीओ विकास सिंह, एपीओ मनरेगा रंजीत कुमार सिंह और संबंधित तकनीकी अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। हालांकि संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की


ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, मुख्य विकास अधिकारी और मनरेगा विभाग के उच्चाधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मस्टरोल, उपस्थिति फोटो, भुगतान रिकॉर्ड और कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए।


जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति


फिलहाल ये आरोप ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मनरेगा कार्यों में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं। ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई हो सके।