भीषमपुर के तालाब में अचानक छटपटाने लगीं लाखों की मछलियां करीब तीन लाख रुपये के नुकसान से ठेकेदार राजू साहनी परेशान, जहरीले पदार्थ या प्राकृतिक आपदा की आशंका

भीषमपुर के तालाब में अचानक छटपटाने लगीं लाखों की मछलियां
करीब तीन लाख रुपये के नुकसान से ठेकेदार राजू साहनी परेशान, जहरीले पदार्थ या प्राकृतिक आपदा की आशंका


चकिया/चंदौली। चकिया तहसील क्षेत्र के भीषमपुर गांव स्थित एक तालाब में अचानक बड़ी संख्या में मछलियों के मरने से हड़कंप मच गया। तालाब में पाली गई मछलियां अचानक पानी की सतह पर आकर छटपटाने लगीं और देखते ही देखते बड़ी संख्या में मछलियां मर गईं। इस घटना से मछली पालन करने वाले ठेकेदार Raju Sahni को लगभग तीन लाख रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है।


घटना के बाद तालाब के आसपास ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। मछलियों को तड़प-तड़प कर मरते देख ठेकेदार राजू साहनी काफी निराश नजर आए। उनका कहना है कि उन्होंने मेहनत और कर्ज लेकर तालाब में मछली पालन किया था, लेकिन अचानक हुई इस घटना ने उन्हें आर्थिक रूप से तोड़ दिया है।


अचानक पानी की सतह पर आने लगीं मछलियां


स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह तालाब में मछलियां सामान्य स्थिति में थीं, लेकिन कुछ ही देर बाद वे तेजी से पानी की सतह पर आने लगीं और छटपटाने लगीं। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में मछलियां मरने लगीं।


ग्रामीणों का कहना है कि घटना के बाद तालाब के पानी में अजीब तरह की बदबू भी महसूस की गई। इससे लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि कहीं तालाब में कोई जहरीला पदार्थ तो नहीं डाला गया।


एक ग्रामीण ने बताया,


?इतनी बड़ी संख्या में मछलियों का अचानक मरना सामान्य बात नहीं है। लगता है पानी में कुछ गड़बड़ी हुई है।?
प्राकृतिक आपदा या जहरीले पदार्थ की आशंका
घटना को लेकर अलग-अलग आशंकाएं जताई जा रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि हाल के मौसम परिवर्तन और तेज गर्मी के कारण पानी में ऑक्सीजन की कमी हो गई होगी, जिससे मछलियां मर गईं।


वहीं कई ग्रामीणों ने आशंका जताई कि तालाब में किसी जहरीले पदार्थ के पहुंचने से यह हादसा हुआ हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार पानी में रासायनिक बदलाव, जहरीले तत्व या ऑक्सीजन की कमी मछलियों की मौत का कारण बन सकती है। हालांकि वास्तविक कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


ठेकेदार राजू साहनी का छलका दर्द


घटना के बाद ठेकेदार राजू साहनी काफी परेशान दिखे। उन्होंने बताया कि मछली पालन में उन्होंने बड़ी रकम निवेश की थी और इसी से परिवार का पालन-पोषण होता था।


राजू साहनी ने कहा,


?हमने मेहनत करके तालाब तैयार किया था। लाखों रुपये की मछलियां थीं। अचानक सब खत्म हो गया। अब समझ में नहीं आ रहा कि परिवार कैसे चलेगा।?
उन्होंने प्रशासन से आर्थिक सहायता और नुकसान का मुआवजा देने की मांग की है।


ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग


घटना के बाद ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन और मत्स्य विभाग से मामले की जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पानी की जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मछलियों की मौत किन कारणों से हुई।


एक ग्रामीण ने कहा,


?अगर जहरीला पदार्थ डाला गया है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इससे दूसरे तालाबों को भी खतरा हो सकता है।?


प्रशासन से मुआवजे की मांग


स्थानीय लोगों और ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन, आपदा विभाग और मत्स्य विभाग से मांग की है कि नुकसान का आकलन कर पीड़ित ठेकेदार को मुआवजा दिया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा या अन्य कारणों से हुए नुकसान में प्रशासन को मदद करनी चाहिए, ताकि मछली पालन करने वाले लोगों को राहत मिल सके।


मत्स्य पालन व्यवसाय पर संकट


क्षेत्र में मछली पालन कई लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है। इस तरह की घटनाओं से छोटे मछली पालकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।


विशेषज्ञों का कहना है कि तालाबों के पानी की नियमित जांच और वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


जांच और राहत पर टिकी निगाहें


भीषमपुर तालाब में मछलियों की मौत का मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब लोगों की निगाहें तहसील प्रशासन और संबंधित विभागों की जांच पर टिकी हैं।
यदि समय रहते कारणों का पता लगाकर आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं, जिससे मछली पालन व्यवसाय पर गंभीर असर पड़ सकता है।