साबरमती स्टेशन पर राज्यपाल का निरीक्षण, विकास कार्यों को बताया ऐतिहासिक

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने साबरमती रेलवे स्टेशन का किया निरीक्षण

पुनर्विकास कार्यों की सराहना, ट्रेन से दिल्ली के लिए हुए रवाना

अहमदाबाद। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने पुनर्विकसित किए जा रहे साबरमती रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्टेशन पर प्रदर्शित मॉडल और पुनर्विकास योजना का अवलोकन किया। निरीक्षण के समय मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने राज्यपाल को साबरमती रेलवे स्टेशन तथा NHSRCL (बुलेट ट्रेन) स्टेशन परियोजना की विस्तृत जानकारी दी।

निरीक्षण के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि उन्हें पहली बार साबरमती रेलवे स्टेशन देखने का अवसर मिला है। उन्होंने बताया कि स्टेशन परियोजना की जानकारी मिलने के बाद वे अत्यंत प्रसन्न और आश्चर्यचकित हैं।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई बुलेट ट्रेन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है और गुजरात में इसका कार्य प्रभावशाली ढंग से संचालित हो रहा है। उन्होंने कहा कि नियमित रूप से संचालित ट्रेनों के संचालन में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न किए बिना इतने भव्य और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण अपने आप में अद्वितीय है।

उन्होंने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि भारत सरकार की कैबिनेट द्वारा धोलेरा से साबरमती तक सेमी हाई स्पीड ट्रेन परियोजना को लगभग 20 हजार करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। साथ ही अहमदाबाद एवं गांधीनगर क्षेत्र मेट्रो नेटवर्क से भी जुड़ा हुआ है, जिससे यात्रियों को बेहतर और निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी।

राज्यपाल ने कहा कि साबरमती स्टेशन को अत्यंत व्यवस्थित और आधुनिक रूप से विकसित किया जा रहा है, जहां आने और जाने वाली ट्रेनों के लिए अलग व्यवस्था होगी। बुलेट ट्रेन, मेट्रो और अन्य ट्रेनों का यह संगम भविष्य में एक दर्शनीय केंद्र बनेगा, जिस पर देशवासियों को गर्व होगा। उन्होंने इस विकास कार्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेलवे प्रशासन एवं अधिकारियों को श्रेय दिया।

राज्यपाल ने बताया कि वे ट्रेन द्वारा दिल्ली के लिए प्रस्थान कर रहे हैं और प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप उन्होंने संकल्प लिया है कि भविष्य में उनकी अधिकांश यात्राएं रेल एवं एसटी बसों के माध्यम से होंगी। उन्होंने कहा कि वे हर सप्ताह गुजरात के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों के बीच जाते हैं, जनसभाएं करते हैं और वृक्षारोपण कार्यक्रमों में भाग लेते हैं। अब वे इन यात्राओं में हवाई मार्ग के बजाय रेलवे एवं बसों को प्राथमिकता देंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि ऊर्जा संरक्षण और देशहित में योगदान देने के उद्देश्य से उन्होंने अपने काफिले को सीमित करते हुए केवल तीन वाहनों तक रखा है।