किसान और मजदूर: शब्द नहीं, तपस्या हैं - रोहित कुमार कनौजिया

किसान और मजदूर: शब्द नहीं, तपस्या है
​लेखक: रोहित कुमार कनौजिया के विचारों पर आधारित
​अक्सर राजनीति के ऊंचे मंचों से 'किसान' और 'मजदूरी' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना बहुत आसान होता है। सफेद कुर्ते-पाजामे में सजे नेता जब माइक थामते हैं, तो उनके भाषणों में पसीने की खुशबू कम और वोटों की गंध ज्यादा होती है। लेकिन सच तो यह है कि किसान और मजदूर कहना जितना आसान है, होना उससे हजार गुना कठिन है।
​1. एसी की हवा और खेतों की लू
​राजनेताओं के लिए 'किसान' महज एक वोट बैंक का आंकड़ा है। वे मंच से बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन क्या उन्होंने कभी जेठ की दुपहरी में उस तपती धूप का सामना किया है जिसमें एक किसान अपनी पीठ जलाकर देश का पेट भरता है? जब तक पैर की बिवाइयां न फटें, तब तक मिट्टी का दर्द समझ नहीं आता।
​2. पसीने की कीमत और भाषण की कीमत
​मंच पर खड़े होकर सहानुभूति जताना एक कला हो सकती है, लेकिन एक मजदूर के लिए मजदूरी करना उसकी मजबूरी और स्वाभिमान का मिश्रण है। रोहित कुमार कनौजिया जी का मानना है कि:
​"जो नेता आज मंचों से मजदूरों के हक की बात करते हैं, अगर उन्हें सिर्फ एक दिन फावड़ा थामकर धूप में खड़ा कर दिया जाए, तो उन्हें पता चल जाएगा कि 'मजदूर' शब्द का वजन कितना होता है।"
​3. कथनी और करनी का अंतर
​जब कोई नेता सच में मजदूरी करने उतरता है, तब उसे समझ आता है कि पसीने की एक बूंद की कीमत क्या होती है। कहना आसान है कि हम किसानों के साथ हैं, लेकिन जब फसल बर्बाद होती है या मजदूरी का सही दाम नहीं मिलता, तब वही नेता अक्सर अपने वातानुकूलित कमरों में चैन की नींद सो रहे होते हैं।
​4. असली पहचान: संघर्ष या सत्ता?
​आज के दौर में किसान और मजदूर को ऐसे ढाल की तरह इस्तेमाल किया जाता है जिसे चुनाव के बाद कोने में रख दिया जाता है। लेकिन याद रहे, जिस दिन ये किसान और मजदूर अपनी ताकत पहचान लेंगे, उस दिन मंचों पर दी जाने वाली खोखली दलीलें काम नहीं आएंगी।
​निष्कर्ष
​किसान और मजदूर होना कोई पेशा नहीं, बल्कि इस देश की रीढ़ है। जो लोग मंच पर खड़े होकर इन शब्दों का मजाक बनाते हैं, उन्हें एक बार खेत की मेड़ पर बैठकर उस रोटी का स्वाद चखना चाहिए जो पसीने से भीगकर थाली तक पहुँचती है।
​रोहित कुमार कनौजिया का यह संदेश स्पष्ट है: "किसान और मजदूर कहना आसान है, पर उनका दर्द जीना हर किसी के बस की बात नहीं।"