चिन्मय विद्यालय,एनटीपीसी ऊंचाहार में आध्यात्मिक एवं नैतिक जागरण का प्रेरणादायक आयोजन

ऊंचाहार,रायबरेली।बुधवार नोएडा चिन्मय मिशन के पूज्य स्वामी चिदरूपानंद जी का आगमन चिन्मय विद्यालय में अत्यंत हर्ष एवं श्रद्धा के साथ हुआ। विद्यालय परिवार ने उनका पारंपरिक रूप से 'पूर्ण कुम्भकम'द्वारा स्वागत कर अपनी आस्था एवं सम्मान प्रकट किया।फलस्वरूप वातावरण भक्तिमय एवं प्रेरणादायक बन गया।इसके उपरांत एनटीपीसी ऑडिटोरियम में विभिन्न सत्रों का आयोजन किया गया।प्रथम सत्र में कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने गुड हैबिट्स विषय पर अत्यंत सरल,रोचक एवं प्रेरणादायक शैली में अपने विचार साझा किए।उन्होंने बताया कि अच्छे संस्कार और आदतें ही विद्यार्थी के उज्ज्वल भविष्य की नींव होती हैं।उन्होंने बच्चों को अनुशासन,नियमित अध्ययन,सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के महत्त्व को समझाया,जिससे उनकी शिक्षा अधिक प्रभावी एवं सार्थक बन सके।इसके पश्चात प्रातः 11से 12 बजे तक कक्षा 9 एवं 10 के विद्यार्थियों के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया,जिसमें स्वामी जी ने लाइफ मैनेजमेंट एवं टाइम मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभवों एवं ज्ञान को साझा किया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि जीवन में सफलता केवल ज्ञान से नहीं,बल्कि समय के उचित प्रबंधन, लक्ष्य निर्धारण,आत्मानुशासन एवं दृढ़ इच्छाशक्ति से प्राप्त होती है।साथ ही उन्होंने एक आदर्श विद्यार्थी के गुणों?जैसे ईमानदारी,परिश्रम,विनम्रता एवं जिम्मेदारी पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।इस पूरे आयोजन के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि चिन्मय मिशन समय-समय पर ऐसे प्रेरणादायक सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों का विकास एवं व्यक्तित्व निर्माण हेतु निरंतर प्रयासरत रहता है।यह पहल न केवल विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में सहायक है, बल्कि उन्हें एक सशक्त एवं जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करती है।सायंकालीन समय में विद्यालय के समस्त शिक्षकगण एवं उनके परिवारजनों के लिए भी एक विशेष सत्र आयोजित किया गया, जिसमें स्वामी जी ने हाउ टू पेरेंटिंग पर गहन विचार प्रस्तुत किए।इस सत्र ने सभी के हृदय को स्पर्श किया और जीवन को संतुलित एवं सार्थक बनाने की प्रेरणा दी।इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री मनीष कुमार स्वामी ने स्वामी जी का हार्दिक स्वागत करते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया।उन्होंने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक मार्गदर्शन से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों दोनों को नई ऊर्जा एवं दिशा प्राप्त होती है।
कार्यक्रम के अंत में पूरे विद्यालय परिसर में एक सकारात्मक,भावनात्मक एवं प्रेरणादायक वातावरण व्याप्त रहा, जिसने सभी के मन में एक नई चेतना और उत्साह का संचार किया।