डॉ. सावित्री डागा को भावांजलि, ‘संभावना’ संस्था ने आयोजित किया स्मरण कार्यक्रम

जोधपुर। महिलाओं की साहित्यिक संस्था "संभावना"की संस्थापिका एवं प्रख्यात साहित्यसेवी डॉ. सावित्री डागा की पुण्यतिथि पर संस्था द्वारा भावांजलि स्मरण कार्यक्रम का आयोजन डॉ. मदन-सावित्री डागा साहित्य भवन में किया गया। कार्यक्रम में साहित्य जगत से जुड़े अनेक रचनाकारों एवं संस्था सदस्यों ने डॉ. डागा को श्रद्धापूर्वक याद किया और उनके साहित्यिक योगदान को नमन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध शायर इफ्तिखार आरिफ के शेर?

"एक चिराग, एक किताब और एक उम्मीद आसासा" इसके बाद तो जो कुछ भी है केवल अफसाना है?

के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. पद्मजा शर्मा ने उक्त शेर के माध्यम से डॉ. सावित्री डागा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनके साहित्यिक अवदान को प्रेरणास्रोत बताया।

संस्था की अध्यक्ष बसंती पवार एवं डॉ. चाँद कौर जोशी ने अपने संस्मरण साझा करते हुए डॉ. डागा को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में डॉ. अंजना चौधरी, आशा पाराशर, डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, शिवानी पुरोहित, मंजु शर्मा मनी, डॉ. सूरज माहेश्वरी, दीपिका मॉयल, अमिता भंडारी एवं डॉ. तृप्ती गोस्वामी ने डॉ. डागा की साहित्यिक साधना और जीवन संघर्ष को उनकी रचनाओं एवं कविताओं के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में कमला सुराणा, सुशीला भंडारी, अर्चना बिस्सा सहित "संभावना" संस्था के पदाधिकारी, सदस्य एवं अनेक साहित्यकार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने डॉ. सावित्री डागा के साहित्य प्रेम, महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु किए गए प्रयासों और संस्था निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. मनीषा डागा ने उपस्थित सभी साहित्यकारों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।