इलिया: थाने से जाते-जाते पशु तस्करों को पकड़कर सलाखों के पीछे डाल गए अरुण प्रताप सिंह, यहां से घेराबंदी कर 10 गोवंश बरामद, बिहार ले जाए जा रहे 4 अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार।

सख्त कार्यशैली के लिए चर्चित थानाध्यक्ष अरुण प्रताप सिंह ने अवैध गतिविधियों पर कसा शिकंजा, जनसरोकारों को दी प्राथमिकता।

संवाददाता कार्तिकेय पाण्डेय

चंदौली। जनपद में पशु तस्करी और गोवंश के अवैध परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत इलिया थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। बुधवार को खझरा पहाड़ी के समीप घेराबंदी कर पुलिस ने 10 गोवंश बरामद किए और उन्हें वध के लिए पैदल हांककर बिहार ले जा रहे 4 शातिर अंतर्राज्यीय तस्करों को गिरफ्तार कर लिया।

जानकारी के अनुसार, थानाध्यक्ष इलिया अरुण प्रताप सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम 18 फरवरी को गश्त पर थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि कुछ तस्कर गोवंशों को लेकर खझरा पहाड़ी के रास्ते बिहार सीमा में प्रवेश करने वाले हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने ग्राम खझरा के पास पहाड़ी क्षेत्र में घेराबंदी कर दबिश दी और मौके से चार अभियुक्तों को धर दबोचा।गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दशरथ राम (58 वर्ष), संजय पाण्डेय (45 वर्ष), मारकण्डेय धोबी (50 वर्ष) और दूलारे पासवान (40 वर्ष) निवासी जनपद कैमूर (भभुआ), बिहार के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे गोवंशों को वध के लिए बिहार ले जा रहे थे। पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है।इलिया पुलिस ने अभियुक्तों के विरुद्ध मुकदमा अपराध संख्या 11/2026 के तहत गोवध निवारण अधिनियम की धारा 3/5ए/8 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 3(5) के अंतर्गत मामला दर्ज किया है। बरामद 10 गोवंशों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है।इस सफल कार्रवाई में थानाध्यक्ष अरुण प्रताप सिंह के साथ उपनिरीक्षक गिरीश बल्लभ शुक्ल, रवीन्द्र कुमार सिंह, हेड कांस्टेबल हरिकिशुन प्रजापति, कल्लन यादव तथा कांस्टेबल दुर्गविजय वर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

उल्लेखनीय है कि इलिया थाना प्रभारी के रूप में कार्यकाल के दौरान अरुण प्रताप सिंह ने पशु एवं शराब तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा। सक्रिय पुलिस टीम और मजबूत मुखबिर तंत्र के चलते अवैध गतिविधियों पर लगातार अंकुश लगाया गया। इसके साथ ही कस्बे में अवैध स्टैंड को समाप्त कर यातायात व्यवस्था में सुधार किया गया, जिससे जाम की समस्या से लोगों को राहत मिली।ग्रामीणों और कस्बावासियों ने उनके कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में आम जनता की समस्याओं की नियमित सुनवाई हुई और मामलों का निष्पक्ष एवं त्वरित निस्तारण किया गया।