कालका-शिमला यूनेस्को विश्व धरोहर सेक्शन पर स्वदेशी रूप से विकसित एयर ब्रेक कोच सेवा में शामिल किए

विरासत के एक नए युग का आगाज़: उत्तर रेलवे ने कालका-शिमला यूनेस्को विश्व धरोहर सेक्शन पर स्वदेशी रूप से विकसित एयर ब्रेक कोच सेवा में शामिल किए

विरासत रेल यात्रा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, उत्तर रेलवे ने प्रतिष्ठित कालका-शिमला यूनेस्को विश्व धरोहर रेलवे पर स्वदेशी रूप से विकसित एयर ब्रेक सिस्टम से लैस नैरो गेज (NG) कोचों के पहले रेक को आधिकारिक तौर पर सेवा में शामिल किया है।

उन्नत तकनीक वाले इस रेक ने 13 फरवरी,को गाड़ी संख्या 52453 कालका-शिमला एक्सप्रेस के रूप में अपनी पहली यात्रा शुरू की। 7 कोचों (14 यूनिट) और लोको नंबर 714 ZDM3D के साथ यह ट्रेन अपने निर्धारित समय सुबह 06:20 बजे कालका स्टेशन से रवाना हुई।

पारंपरिक ब्रेकिंग सिस्टम से आधुनिक एयर ब्रेक सिस्टम की ओर यह बदलाव कालका कार्यशाला (Workshop) के लिए एक तकनीकी उपलब्धि है, जहाँ यह रूपांतरण कार्य पूरा किया गया। इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं

स्वदेशी विकास: एयर ब्रेक सिस्टम को स्थानीय स्तर पर डिजाइन और एकीकृत किया गया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बेहतर सुरक्षा: इन कोचों में संशोधित बोगियों और ट्रॉलियों का उपयोग किया गया है, जिन्हें कड़े सुरक्षा मानकों के अनुरूप अपग्रेड किया गया है। यह हिमालयी क्षेत्र की खड़ी ढलानों और तीखे मोड़ों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

परिचालन दक्षता: नया सिस्टम पुराने वैक्यूम ब्रेक सिस्टम की तुलना में बेहतर ब्रेकिंग नियंत्रण और दक्षता प्रदान करता है।

इस विश्व धरोहर सेक्शन के लिए सुरक्षा सर्वोपरि है। यात्री सेवा में शामिल करने से पहले, इन कोचों को एक व्यापक मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा

RDSO परीक्षण: विस्तृत ऑसिलेशन ट्रायल, इमरजेंसी ब्रेकिंग डिस्टेंस (EBD) परीक्षण और नियंत्रणीयता परीक्षण किए गए।

वैधानिक अनुपालन: रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) द्वारा सफल सत्यापन।

परिचालन स्वीकृति: उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक द्वारा यात्री सेवा शुरू करने की अंतिम मंजूरी दी गई।

अशोक कुमार वर्मा, महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे ने कहा, "एयर ब्रेक कोचों की शुरुआत कालका-शिमला लाइन की विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ हमारे यात्रियों को आधुनिक सुरक्षा मानकों और लागत प्रभावी तकनीकी प्रगति का लाभ सुनिश्चित करने की हमारी दोहरी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।"

आधुनिकीकरण का यह प्रयास सुनिश्चित करता है कि कालका-शिमला रेलवे का सदी पुराना आकर्षण 21वीं सदी की इंजीनियरिंग से लैस हो, जिससे दुनिया भर के पर्यटकों के लिए सुरक्षित और सुगम यात्रा की गारंटी मिल सके।

हिमांशु शेखर उपाध्याय मुख्य जनसंपर्क अधिकारी