हरदोई में निलंबित अवर अभियंताओं की बहाली पर उठे सवाल, नियम विरुद्ध उसी खंड में तैनाती का आरोप, पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह

हरदोई। उत्तर प्रदेश सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध घोषित 'जीरो टॉलरेंस' नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) हरदोई में घटिया सड़क निर्माण और तकनीकी अनियमितताओं के आरोप में निलंबित किए गए अवर अभियंताओं की बहाली और उसी खंड में उनकी तैनाती को लेकर विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि जिन अभियंताओं को भ्रष्टाचार और मानकों से समझौता करने के आरोप में निलंबित किया गया था, उन्हें बिना किसी स्पष्ट सार्वजनिक जांच रिपोर्ट जारी किए बहाल कर दिया गया। इतना ही नहीं, आरोप है कि नियमों के विपरीत उन्हें उसी खंड और लगभग उसी क्षेत्र में पुनः तैनाती दे दी गई, जहां वे पहले कार्यरत थे। हाल ही में बहाल किए गए अभियंताओं में रुचि गुप्ता, अमर सिंह, बी.पी. सिंह, मकरंद सिंह यादव, अवधेश गुप्ता और सत्येंद्र कुमार के नाम सामने आए हैं।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष नवंबर में हरदोई जनपद में कराई गई गुणवत्ता जांच में कई प्रमुख मार्गों के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे थे। जांच में सड़क निर्माण में कम बिटुमिनस सामग्री का प्रयोग, ईटीए मिक्स में इमल्शन न मिलाना और गिट्टी-तारकोल की मात्रा में कटौती जैसी गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर 16 अभियंताओं को निलंबित कर विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे।
अब बिना स्पष्ट स्पष्टीकरण के की गई इस बहाली ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जानकारों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में स्पष्ट जांच और दोष निर्धारण नहीं होता, तो भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई केवल कागजी साबित होगी। अब देखना यह होगा कि शासन इस प्रकरण पर क्या रुख अपनाता है।