नहीं हैं चैन में प्राणी,कटी है धर्म की डाली...

🕉️बढ़े हैं दैत्य इस जग में,करो अब अंत मॉं काली।
नहीं हैं चैन में प्राणी,कटी है धर्म की डाली।।

🕉️हृदय है ज्ञान से खाली,दुखी है श्याम की गीता।
फिरे हर मार्ग में रावण,व्यथित है राम की सीता।।
लगे अब चैत सावन सा,नशे में चूर है माली।
नहीं हैं चैन-------------

🕉️बड़ा व्यापार मदिरा का,करें अब राष्ट्र के राजा।
सुनें मत चीख दीनों की,बजें नित शीश पे बाजा।।
नदी सुख-चैन की सूखी,बहे अब शोक की नाली।
नहीं हैं चैन---------------

🕉️नहीं है न्याय की आशा,दुखी हैं हिन्द के वासी।
किधर हनुमान है मेरा,बिलखती राम की दासी।।
किधर हैं आज माँ दुर्गा,धरा है धर्म से खाली।
नहीं हैं चैन----------------

डी डी शुक्ला
प्रभुपग धूल
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नीति नियम,कानून,संविधान,नैतिकता, मानवता,मर्यादा आदि के दायरों को तोड़ना नैतिक और विधिक अपराध अक्सर कुत्सित विचारों और गलत आचरण के लोग अपने निजी स्वार्थ,लालच,ईर्ष्या,प्रतिशोध आदि से वशीभूत होकर ऐसी साजिशें और अपराध कर गुजरते हैं, जो सभ्य मानव समाज को कभी स्वीकार्य नहीं होते। जबकि ऐसा करने वाले कभी सुखी नही रहते।