जनसुनवाई पोर्टल बना मज़ाक, झूठी आख्या से रौंदी जा रही जनता की आवाज़!

जनसुनवाई पोर्टल बना मज़ाक, झूठी आख्या से रौंदी जा रही जनता की आवाज़!

हरदोई
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति पर जनता को अटूट भरोसा है,लेकिन हरदोई में वही नीति कागज़ों में दफन की जा रही है। IGRS जनसुनवाई पोर्टल, जो न्याय का माध्यम होना चाहिए था,आज झूठी, मनगढ़ंत और भ्रामक आख्या लगाने का अड्डा बनता जा रहा है। शिकायतों का निस्तारण समाधान से नहीं,
फाइल बंद करने की साज़िश के तहत किया जा रहा है।

❓ सवाल सीधा है?
क्या हरदोई का सरकारी तंत्र मुख्यमंत्री की मंशा को खुलेआम चुनौती दे रहा है? या फिर जिम्मेदार अफसरों को झूठी रिपोर्ट लगाकर शिकायत दबाने की खुली छूट है?

मामला?
विकास खंड अहिरोरी के ग्राम खेरवा कमालपुर निवासी पीड़िता ने आंगनवाड़ी भर्ती प्रक्रिया में लेखपाल पर गंभीर हेराफेरी का आरोप लगाते हुए
IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।

❗ पीड़िता का आरोप है कि
संबंधित कर्मचारी ने जांच किए बिना, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर
झूठी आख्या लगाई और शिकायत को जबरन निस्तारित दिखा दिया। इससे न सिर्फ पीड़िता का हक़ मारा गया,
बल्कि मुख्यमंत्री के जनसुनवाई तंत्र की साख पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

🟥 अब सवाल यह नहीं कि शिकायत सही थी या नहीं,
🟥 सवाल यह है कि
झूठी आख्या लगाने वाले कर्मचारी पर कार्रवाई कब होगी?
🟥 क्या जनसुनवाई पोर्टल अब न्याय का नहीं, शिकायत दबाने का औज़ार बन चुका है?

⚠️ यदि ऐसे मामलों पर शीघ्र कठोर कार्रवाई नहीं हुई,
तो जनता का भरोसा जनसुनवाई से उठना तय है?
और इसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।