कथावाचक राधेश्याम शास्त्री पर लगाए धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप

धार्मिक नगरी के प्रख्यात भागवत कथा प्रवक्ता पर सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट में करोड़ों की धोखाधड़ी कर गबन करने का आरोप लगा है। इस मामले में दर्ज आपराधिक मुकदमे की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। जो न्यायालय में विचाराधीन है। यहां बताते चले कि प्रसिद्ध कथा प्रवक्ता राधेश्याम शास्त्री पर कोलकाता की श्री गिर्राज सेवा ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा कागजात में हेराफेरी कर करोड़ों की नगदी और संपत्ति हड़पने के गम्भीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में ट्रस्ट के अध्यक्ष भगवती प्रसाद केडिया ने शनिवार को एक प्रेस वार्ता में प्रकरण से संबंधित दस्तावेज पेश करते हुए बताया कि कथा प्रवक्ता राधेश्याम शास्त्री की आध्यात्म प्रचार के प्रति रुचि को देखते हुए उनके सहयोग के लिये वर्ष 2007 में सार्वजनिक ट्रस्ट श्री गिर्राज सेवा ट्रस्ट का गठन किया गया।जिसमें नियमानुरूप उनकी अध्यक्षता में सात से इक्कीस ट्रस्टी नियुक्त किए गए थे। जिसका उद्देश्य आध्यात्म प्रचार के साथ समाज सेवा से जुड़े विभिन्न प्रकल्पों का संचालन करना था। इसके तहत क्रूज द्वारा विदेशों में भी धर्म संस्कृति का प्रचार प्रसार करना था। श्री केडिया ने बताया कि ट्रस्ट की ख्याति बढ़ने के साथ ही इसमें सदस्यों की संख्या में वृद्धि होती गई। इसके बाद समाज सेवा के लिए वृन्दावन के रमनरेती इलाके में चार हजार वर्ग गज भूमि खरीदी गई जिस पर धर्मशाला और अन्नक्षेत्र संचालित किए जाने थे। लेकिन ट्रस्ट की संपत्ति में बढ़ोत्तरी देखकर कथा प्रवक्ता राधेश्याम शास्त्री की नीयत में खोट आ गया। इसके बाद उन्होंने षड्यंत्र रचते हुए ट्रस्ट के कागजातों में हेराफेरी कर फर्जी कागजात तैयार कर लिए। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ट्रस्ट की बैंक में जमा करोड़ों रुपए की रकम गलत ढंग से हड़प ली। जिसकी जानकारी होने पर ट्रस्टियों ने राधेश्याम शास्त्री को ट्रस्ट से निष्कासित करते हुए वर्ष 2017 में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न आपराधिक धाराओं में मुकदमा पंजीकृत करा दिया था। जो न्यायालय में लंबित है। उन्होंने बताया कि इस प्रकरण में जांच अधिकारी द्वारा कागजातों की फॉरेंसिक जांच कराने के बाद वादी द्वारा लगाए गए आरोपों को सही ठहराते हुए न्यायालय के समक्ष शपथपत्र भी प्रस्तुत किया गया है। इस संबंध में श्री गिर्राज सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष समेत अन्य सदस्यों का कहना है कि इस मामले उच्च स्तरीय जांच होकर आरोपियों के विरुद्ध कार्यवाही होनी चाहिए। इस मौके पर ट्रस्ट के चेयरमैन भगवती प्रसाद केड़िया, उपाध्यक्ष उमाशंकर शर्मा, संयुक्त सचिव हेमंत कुमार जैन, व्यवस्थापक केशव दत्त शर्मा आदि मौजूद रहे।