डीएफसीसीआईएल द्वारा मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन

डीएफसीसीआईएल द्वारा मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर में विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन

बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास और शैक्षणिक शिक्षा के बीच की खाई को पाटने की महत्वपूर्ण पहल के तहत, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) की प्रयागराज टीम ने मदन मोहन मालवीय यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (MMMUT), गोरखपुर का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के निर्माण एवं संचालन में अपनाई जाने वाली अत्याधुनिक तकनीकों एवं सर्वोत्तम प्रथाओं का ज्ञान छात्रों एवं संकाय सदस्यों के साथ साझा करना था।

यह पहल उत्तर प्रदेश की राज्यपाल तथा डीएफसीसीआईएल के प्रबंध निदेशक प्रवीण कुमार के बीच हुए विमर्श के उपरांत की गई है। इसमें यह निर्णय लिया गया कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण में प्रयुक्त आधुनिक तकनीकों, विशेष मशीनों एवं नवाचारों की जानकारी तकनीकी संस्थानों और विश्वविद्यालयों के छात्रों तक पहुँचाई जाए, जिससे उन्हें वास्तविक औद्योगिक अनुभव प्राप्त हो सके तथा संस्थान फील्ड-स्तरीय प्रशिक्षण की व्यवस्था कर सकें।

इसी क्रम में प्रथम चरण के अंतर्गत डीएफसीसीआईएल प्रयागराज टीम द्वारा, मुख्य महाप्रबंधक ए. बी. सरन के नेतृत्व में, ?ट्रांसफॉर्मिंग ट्रांसपोर्टेशन? विषय पर एक ?विशेष संवाद कार्यक्रम? का आयोजन एमएमएमयूटी, गोरखपुर में किया गया। इस कार्यक्रम में डीएफसीसीआईएल द्वारा अपनाई गई अत्याधुनिक तकनीकों और उनके परिणामस्वरूप रेल परिचालन में हुए सुधारों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया।

तकनीकी सत्र के दौरान सिविल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में यंत्रीकृत ट्रैक लेइंग हेतु न्यू ट्रैक कंस्ट्रक्शन (एनटीसी) मशीन, उन्नत अर्थवर्क एवं फॉर्मेशन तकनीकें, तीव्र गति से निर्माण की कार्यप्रणालियाँ, पुलों की डिजाइन, डीएफसी टर्नआउट की विशेषताएँ एवं भारतीय रेल टर्नआउट से तुलना, हाइड्रोलिक पुलर्स द्वारा रेल डी-स्ट्रेसिंग, कंटीन्युअस वेल्डेड रेल (सीडब्ल्यूआर) तथा रेल हैंडलिंग डिपो के कार्यकलापों पर विस्तृत जानकारी दी गई।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सत्र में ऑगर मशीन (टेस्कर), रेल-कम-रोड व्हीकल्स (आरआरवी) जैसे पॉलफिंगर एवं कोलमार, जीइसमार मास्ट ग्रैबर, ऑटो-टेंशनिंग वायर मशीन, ऑटो फॉल्ट डिटेक्शन सिस्टम, स्वदेशी घटकों से निर्मित कैंटिलीवर डिजाइन, 225 केवी ट्रैक्शन सिस्टम एवं उसके लाभ, ट्रैक्शन सब-स्टेशनों की तकनीकी विशेषताएँ, स्काडा (SCADA) प्रणाली, ओएचई अर्थ क्लैम्प तथा गैस इंसुलेटेड सब-स्टेशन (जीआईएस) के विषय में जानकारी साझा की गई।

सिग्नलिंग एवं टेलीकम्युनिकेशन क्षेत्र में ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम एवं वीडियो वॉल सिस्टम के माध्यम से ट्रेनों की लाइव मॉनिटरिंग एवं यूनिक आईडी के साथ ट्रैकिंग, मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर, जीएसएम-आर तकनीक, ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वार्निंग सिस्टम (कवच) तथा ऑटो लोकेशन हट्स की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग के अंतर्गत रोलिंग स्टॉक की सेहत और सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु मशीन विज़न इंस्पेक्शन सिस्टम, हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्टर (एचएबीडी) तथा व्हील इम्पैक्ट लोड डिवाइस (वाइल्ड) की उपयोगिता और महत्त्व को समझाया गया।

डीएफसीसीआईएल टीम ने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) की भारत के लॉजिस्टिक्स एवं परिवहन क्षेत्र में परिवर्तनकारी भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

ईडीएफसी के सफल कमीशनिंग के पश्चात लगभग 100 प्रतिशत मालगाड़ियों के स्थानांतरण के साथ इसकी परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।विशेष रूप से माघ मेला-2026 के दौरान 12 जनवरी को 525 ट्रेनों का संचालन कर ईडीएफसी ने 30 मार्च 2025 के 508 ट्रेनों के पिछले रिकॉर्ड को पार कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया, जो इसकी उच्च क्षमता और भविष्य की मांगों को पूरा करने की क्षमता को दर्शाता है।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित शिक्षकों में विजय कुमार द्विवेदी (प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट समन्वयक), डॉ. अनिल पाल (सहायक प्रो., इलेक्ट्रिकल), डॉ. विनय (सहायक प्रो सिविल), डॉ. राजन मिश्रा (एसोसिएट प्रोफेसर, इलेक्ट्रिकल), डॉ. पल्लव गुप्ता (एसोसिएट प्रोफेसर, मैकेनिकल इंजीनियरिंग) एवं सुकन्या पांडेय (प्रशिक्षण समन्वयक) उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मैकेनिकल इंजीनियरिंग के तृतीय वर्ष के छात्र श्री अजय माधेसिया द्वारा किया गया।

इस अवसर पर डीएफसीसीआईएल के वरिष्ठ अधिकारियों?ए. बी. सरन (मुख्य महाप्रबंधक),ए. एस. तोमर (जीजीएम/सिग्नल एवं दूरसंचार/कार्पोरेट कार्यालय),आशीष मिश्रा (महाप्रबंधक/सुरक्षा/ईडीएफसी),मन्नू प्रकाश दुबे (एजीएम/ओपी एंड बीडी/ईडीएफसी),राजनाथ सिंह (उप परियोजना प्रबंधक/इलेक्ट्रिकल/प्रयागराज) एवं भुवनेश पांडेय (जेपीएम/सिविल/प्रयागराज) ने अपने-अपने क्षेत्रों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम कुलपति प्रो. जय प्रकाश सैनी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ।

यह संवाद कार्यक्रम शिक्षकों एवं छात्रों द्वारा अत्यंत सराहा गया। 250 से अधिक छात्रों की सहभागिता के साथ यह आयोजन उद्योग-शिक्षा सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ, जो भावी इंजीनियरों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने हेतु प्रेरित करेगा।