बेतिया राज की जमीन पर बसे लोगों में बढ़ी बेचैनी, 

बेतिया। बेतिया राज की जमीन पर वर्षों से बसे लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। बिहार सरकार की ओर से अतिक्रमण हटाने को लेकर नोटिस जारी किए जाने के बाद प्रभावित परिवारों में डर और आक्रोश दोनों साफ तौर पर देखा जा रहा है। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर जमीन खाली नहीं की गई तो प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाकर जमीन को मुक्त कराया जाएगा।

इस कार्रवाई से सदमे में आए लोग दिन-प्रतिदिन मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे और उनके पूर्वज दशकों से इस जमीन पर बसे हुए हैं। ?हमारे दादा-परदादा से लेकर आज तक हम यहीं रह रहे हैं। अचानक सरकार नोटिस जारी कर हमें बेघर करने पर आमादा है,? स्थानीय निवासियों ने कहा। उनका आरोप है कि सरकार बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें उजाड़ना चाहती है।

प्रभावित लोगों ने सरकार से मांग की है कि यदि जमीन खाली कराई जानी है तो पहले उन्हें कहीं बसाया जाए। उनका कहना है कि ?पहले बसाओ, फिर उजाड़ो? की नीति अपनाई जानी चाहिए, ताकि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार सड़क पर न आ जाएं।

इधर, वाल्मीकिनगर विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने इस मुद्दे पर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बिहार सरकार की करोड़ों रुपये की जमीन पर अतिक्रमण है, जिसे पहले खाली कराया जाना चाहिए। विधायक का कहना है कि ?बिहार के बाहर मौजूद बिहार सरकार की जमीन को मुक्त कराने के बाद ही बिहार के भीतर बसे लोगों को हटाने की कार्रवाई होनी चाहिए।?

इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। फिलहाल, प्रशासन की कार्रवाई और सरकार के अगले कदम को लेकर बेतिया राज की जमीन पर बसे हजारों परिवारों की निगाहें टिकी हुई हैं