खगोलीय घटना: 10 जनवरी को धरती के सबसे करीब होगा 'ग्रहों का राजा' बृहस्पति

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि जब पृथ्वी, सूर्य और बृहस्पति एक सीधी रेखा में होते हैं जिससे यह रात भर, बर्ष में सबसे चमकीला और बड़ा दिखाई देता है, इसे ही विरोध या विपक्ष ( अपोजिशन) कहा जाता है, यह भारत सहित पूरी दुनिया से बिना दूरबीन (टेलीस्कोप) के भी आसानी से दिखाई देगा,खासकर आधी रात के आसपास जब यह आकाश में सबसे ऊंचा होगा और मिथुन राशि (Gemini constellation) में दिखेगा, जोकि एक शानदार खगोलीय घटना है।खगोलीय घटना: 10 जनवरी को धरती के सबसे करीब होगा 'ग्रहों का राजा' बृहस्पति।नए साल 2026 की शुरुआत खगोलीय घटनाओं के शौकीनों के लिए बेहद खास है। आगामी 10 जनवरी 2026 को सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह बृहस्पति (Jupiter) पृथ्वी के ठीक सामने यानी 'अपोजिशन' (Opposition) की स्थिति में होगा।
खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस दुर्लभ खगोलीय घटना की विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि यह साल 2026 का वह समय होगा जब बृहस्पति न केवल पृथ्वी के सबसे करीब होगा, (विरोध/अपोजिशन लगभग 62.8 करोड़ किलोमीटर दूर होता है) , बल्कि अपनी पूरी चमक के साथ पूरी रात आकाश में दिखाई देगा।क्या है 'अपोजिशन' की घटना?खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, "विपक्ष या अपोजिशन (Opposition) वह स्थिति है जब पृथ्वी, सूर्य और बृहस्पति के बीच में आ जाती है। इस दौरान सूर्य पश्चिम में अस्त हो रहा होता है और ठीक उसी समय बृहस्पति पूर्व से उदय होता है। चूंकि इस समय पृथ्वी और बृहस्पति के बीच की दूरी न्यूनतम होती है, इसलिए यह ग्रह आकार में बड़ा और सामान्य से कई गुना अधिक चमकदार दिखाई देता है।"

भारत में कैसा होगा नजारा?

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो, माह जनवरी 2026 की रातों में भारत के अधिकांश स्थानों से बृहस्पति स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, लेकिन, विरोध/ विपरीत के दौरान, भारत के किसी भी कोने से लोग इस शानदार खगोलीय घटना का आनंद ले सकते हैं, इस विरोध के दौरान बृहस्पति ग्रह की चमक का स्तर काफ़ी अनुकूल रहेगा एवं इस दौरान बृहस्पति ग्रह -2.7 मैग्नीट्यूड पर चमकेगा। इस दौरान यह इतना तेजस्वी होगा कि रात के आकाश में चंद्रमा और शुक्र ग्रह के बाद सबसे चमकदार पिंडों में यही बेमिसाल नजर आएगा।कहां और आकाश की किस दिशा में दिखाई देगा बृहस्पति ग्रह।खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि इस दौरान बृहस्पति ग्रह, मिथुन राशि में मौजूद रहेगा , या यूं कहें कि इस बार बृहस्पति मिथुन (Gemini) तारामंडल में स्थित होगा। इसे पहचानने के लिए आप पूर्व की दिशा में दो चमकदार सितारों (कास्टर) कस्तूरि और (पोलक्स) पुलह / पुलस्त्य के पास एक स्थिर रोशनी वाला पिंड देख सकते हैं। वही होगा बृहस्पति ग्रह, इसकीदृश्यता के बारे में जानकारी देते हुए खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह शाम को सूर्यास्त के बाद उदित होगा और पूरी रात आकाश में रहने के बाद अगले दिन सूर्योदय के समय अस्त होगा।खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि दूरबीन से दिखेंगे, बृहस्पति के चार चंद्रमा, और बृहस्पति 10 जनवरी 2026 की रात्रि में पृथ्वी के सबसे नज़दीक भी होगा, इसलिए वह और भी चमकीला दिखेगा,यह खगोलीय घटना आमतौर पर हर 13 महीने में घटित होती है, लेकिन इसका प्रकाश इतना शानदार हर बार नहीं होता है, इसीलिए इस बार इस खगोलीय घटना को ज़रूर देखें,खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि "अपोजिशन" (Opposition) जैसी घटनाएं वैश्विक होती हैं, जिसका अर्थ है कि पूरी पृथ्वी पर जहाँ भी रात होगी, वहां से बृहस्पति (Jupiter) इसी अद्भुत रूप में दिखाई देगा।भारत के लिए समय और दृश्यता क्या होगी।खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि भारत के लिए समय और दृश्यता के हिसाब से तारीख 10 जनवरी, 2026 की पूरी रात रहेगी और लेकिन इसको देखने का सबसे अच्छा समय (पीक टाइम) , रात के 11:00 बजे से रात के 1:00 बजे के बीच होगा, इस समय बृहस्पति आकाश में बिल्कुल बीचों-बीच (शीर्ष पर) होगा, जिससे वायुमंडल का हस्तक्षेप कम होगा और यह सबसे साफ दिखेगा, एवं शाम को पूर्व (East) दिशा में उगेगा, आधी रात को सिर के ऊपर होगा और सुबह पश्चिम (West) में अस्त होगा,इसे कैसे पहचानें खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि बृहस्पति ग्रह को पहचानना बहुत आसान होगा क्योंकि उस रात यह चंद्रमा और शुक्र ग्रह के बाद आकाश में सबसे चमकदार खगोलीय पिंड होगा, इस दौरान बृहस्पति 'मिथुन' तारामंडल में स्थित होगा, एक बहुत ही तेज, स्थिर रोशनी वाला "तारा" जैसा दिखाई देगा,(लेकिन वह तारा नहीं है बल्कि बृहस्पति ग्रह है) वही बृहस्पति ग्रह होगा, लेकिन तारों की तरह, बृहस्पति टिमटिमाएगा (Twinkle) नहीं, बल्कि इसकी चमक और रोशनी स्थिर और शांत होगी, एवं इसकी चमक का मैग्नीट्यूड -2.7 होगा,जो इसे सामान्य से कहीं अधिक तेजस्वी बनाएगी।देखने के लिए उपकरण खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि वैसे तो इसको देखने के लिए आपको किसी भी ख़ास या विशेष खगोलीय उपकरण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आप इसे नग्न आंखों से (Naked Eye) भी देख सकते हैं, क्योंकि यह एक बेहद चमकदार सफेद बिंदु जैसा दिखाई देगा, लेकिनयदि आपके पास एक सामान्य दूरबीन (7x50 या 10x50) है, तो आप बृहस्पति के साथ उसके 4 सबसे बड़े चंद्रमाओं (आयो, यूरोपा, गेनीमीड और कैलिस्टो) को छोटे बिंदुओं के रूप में देख सकते हैं,वहीं, एक अच्छे टेलीस्कोप की मदद से बृहस्पति की सतह पर मौजूद बादलों की धारियां और उसके प्रसिद्ध 'ग्रेट रेड स्पॉट' (Great Red Spot) को भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा, खगोलविद अमर पाल सिंह ने विशेष सलाह देते हुए बताया कि खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वाले छात्रों और आम जनमानस से अपील है कि वे इस खगोलीय घटना का,रात भर भरपूर लाभ उठाएं, उनके अनुसार, "शहरों के प्रदूषण के बावजूद बृहस्पति इतना चमकीला होगा कि इसे अपने घरों से आसानी से देखा जा सकेगा, बस ध्यान रहे कि 10 जनवरी 2026 की रात्रि को आसमान साफ रहे और कोहरा आदि बाधा न बने।