राजकीय विधि स्नातकोत्तर महाविद्यालय बीकानेर में पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लैंगिक चयन का निषेध) अधिनियम, 1994 पर एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया।

बीकानेर रामलाल लावा राजकीय विधि स्नातकोत्तर महाविद्यालय बीकानेर में प्राचार्य प्रो. भगवाना राम बिश्नोई की अध्यक्षता में पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लैंगिक चयन का निषेध) अधिनियम, 1994 पर एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में श्री मुरलीधर उपाध्याय (रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर प्रॉसीक्यूशन, राजस्थान सरकार) रहे। उन्होंने बताया कि प्रसव पूर्व लैंगिक जांच एक संज्ञेय, अशमनीय एवं अजमानतीय अपराध है। उन्होंने इस अधिनियम की मुख्य धाराओं एवं प्रावधानों से विद्यार्थियों को अवगत करवाया। महाविद्यालय स्तर पर राजस्थान राज्य महिला नीति नोडल अधिकारी डॉ मीनाक्षी कुमावत ने बताया कि यह कानून हर बच्चे को चाहे उसका लिंग कोई भी हो, जीवन का समान अवसर देने और समाज में लिंग समानता को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है, यह एक ऐसा कानून है जिसके बारे में प्रत्येक विधि के विद्यार्थी को ज्ञान होना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में डॉ किशन लाल द्वारा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों सहित सभी शैक्षणिक व अशैक्षणिक कर्मचारी उपस्थित रहे।