* हाई कोर्ट की सख्ती के बाद शिकायतों के घेरे में डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय *

ओम हरी फोगाट / गाज़ियाबाद

रजिस्ट्रार डॉ. अलका वर्मा ने कसा शिकंजा, खंगाली कार्यालय की कार्यप्रणाली

गाजियाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद गाजियाबाद स्थित डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर विभागीय निगरानी तेज होती दिखाई दे रही है। गुरुवार को उत्तर प्रदेश फर्म्स, चिट्स एवं सोसाइटीज की रजिस्ट्रार डॉ. अलका वर्मा ने अचानक कार्यालय पहुंचकर कामकाज और अभिलेखों की गहन पड़ताल की।

रजिस्ट्रार के अचानक कार्यालय पहुंचने से कर्मचारियों और अधिकारियों में हलचल बढ़ गई। निरीक्षण के दौरान कार्यालय की कार्यप्रणाली, विभिन्न प्रक्रियाओं और अभिलेखों की स्थिति की जानकारी ली गई। इस दौरान सामने आई प्रक्रियात्मक कमियों को लेकर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधार और प्रक्रिया के अनुरूप कार्य करने के निर्देश दिए गए।

रजिस्ट्रार के सामने पहुंच गए शिकायतकर्ता, खुलकर रखीं शिकायतें

निरीक्षण के दौरान कार्यालय में कई शिकायतकर्ता भी मौजूद थे। जैसे ही उन्हें पता चला कि रजिस्ट्रार स्वयं कार्यालय का निरीक्षण कर रही हैं, कई शिकायतकर्ता सीधे उनके समक्ष पहुंच गए और डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय से संबंधित अपनी शिकायतें और समस्याएं रखीं।

रजिस्ट्रार ने शिकायतकर्ताओं की बातें सुनीं और संबंधित मामलों में आवश्यक कार्रवाई के लिए डिप्टी रजिस्ट्रार को निर्देशित किया। इससे कार्यालय में लंबित शिकायतों और उनके निस्तारण की प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में आ गई।

पहले लखनऊ की टीम ने खंगाले थे कार्यालय के अभिलेख

गौरतलब है कि इससे पहले लखनऊ मुख्यालय से आई तीन सदस्यीय विभागीय टीम द्वारा भी डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय का निरीक्षण किया जा चुका है। अब रजिस्ट्रार की ओर से सीधे कार्यालय पहुंचकर कार्यप्रणाली की समीक्षा किए जाने से विभागीय निगरानी और सख्त होने के संकेत मिले हैं।

मामला केवल कार्यालय की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं है। विभिन्न शिकायतों के साथ-साथ कुछ RWA की कथित मनमानी, सोसाइटी प्रबंधन से जुड़े विवादों और निवासियों की लंबित शिकायतों को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं।

अब नजर लंबित शिकायतों के निस्तारण पर

लगातार निरीक्षण और उच्चस्तरीय निगरानी के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि लंबे समय से लंबित शिकायतों का निस्तारण कब तक होगा और शिकायतकर्ताओं को वास्तविक राहत कब मिलेगी।

निरीक्षण और निर्देश के बाद अब निगाहें कार्रवाई पर हैं।

क्या लंबित शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण होगा?

क्या प्रक्रियात्मक कमियों को दूर कर व्यवस्था में सुधार दिखाई देगा?

और जिन शिकायतों पर निवासी लंबे समय से जवाब का इंतजार कर रहे हैं, उनका समाधान आखिर कब होगा?