* UPI शुल्क के खिलाफ ट्रेड एसोसिएशन का जोरदार प्रदर्शन *

नई दिल्ली। UPI पर नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहा है, मगर इसका विरोध पहले से ही शुरू हो गया है। सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा की अध्यक्षता में सदर बाजार में व्यापारियों ने UPI लेन-देन पर शुल्क लगाए जाने के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान व्यापारियों ने सरकार से डिजिटल भुगतान को अतिरिक्त शुल्क के बोझ से मुक्त रखने की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की।

प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने मांग की कि UPI को पूरी तरह शुल्क मुक्त रखा जाए और व्यापारियों पर किसी भी प्रकार का नया आर्थिक बोझ न डाला जाए।

प्रदर्शन में व्यापारियों ने एकजुट होकर ?व्यापारियों पर नया बोझ, नहीं सहेंगे?नहीं सहेंगे?, ?UPI हमारा अधिकार, शुल्क लगाना बंद करो?, ?डिजिटल भुगतान पर शुल्क बंद करो? जैसे जोरदार नारे लगाए।

परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant (P2M) UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेन-देन होगी। उन्होंने कहा कि भले ही यह शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा, लेकिन इसका आर्थिक बोझ व्यापारी को ही उठाना पड़ेगा।

पम्मा ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई ग्राहक किसी व्यापारी को UPI के माध्यम से ₹5,000 का भुगतान करता है तो 0.4 प्रतिशत के हिसाब से करीब ₹20, ₹10,000 पर ₹40, ₹20,000 पर ₹80 और ₹50,000 पर ₹200 तक MDR बन सकता है। बड़े लेन-देन में यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति लेन-देन तक जा सकता है।

पम्मा ने कहा कि मध्यम वर्ग के व्यापारियों के लिए यह अतिरिक्त शुल्क हर महीने करीब ₹2,000 से ₹5,000 तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन सकता है। उन्होंने कहा कि जिन व्यापारियों के रोजाना बड़ी संख्या में UPI के माध्यम से लेन-देन होते हैं, उनके लिए छोटी-सी प्रतिशत राशि भी महीने के अंत तक एक बड़ी लागत में बदल सकती है।

पम्मा ने कहा कि छोटे और मध्यम व्यापारी पहले ही महंगाई, किराए, कर्मचारियों के वेतन, बिजली-पानी और अन्य बढ़ते व्यापारिक खर्चों का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त लागत डालना व्यापारियों पर एक और आर्थिक बोझ डालने जैसा है।

पम्मा ने कहा, ?सरकार को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना चाहिए, न कि उस पर शुल्क लगाकर व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालना चाहिए। व्यापारी पहले से ही अनेक समस्याओं से जूझ रहे हैं। हम व्यापारियों पर नया बोझ नहीं सहेंगे।?

पम्मा ने सरकार से मांग की कि छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए UPI पर MDR लागू करने के फैसले को वापस लिया जाए और डिजिटल भुगतान व्यवस्था को व्यापारियों के लिए शुल्क मुक्त रखा जाए।

पम्मा ने कहा कि ₹2,000 तक के P2M UPI लेन-देन पर शुल्क नहीं होने के बावजूद ₹2,000 से ऊपर के पात्र लेन-देन पर MDR की व्यवस्था व्यापारियों के लिए चिंता का विषय है। व्यापारियों का कहना है कि बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों के रोजाना होने वाले लेन-देन को देखते हुए छोटी प्रतिशत राशि भी महीने के अंत में एक बड़ी लागत बन सकती है।

सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड्स एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि यदि व्यापारियों पर UPI शुल्क का यह बोझ वापस नहीं लिया गया तो व्यापारी लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध और आंदोलन आगे भी जारी रखेंगे।

इस उपलक्ष पर व्यापारी नेता दीपक निम्भल, वरिंदर अरोड़ा जसविंदर सिंह, दीपक निप्पल, रजनीश राजेश भयना,जसबीर सिंह सरना, बलविंदर सिंह सरना, राजीव सोहर, तरुण सोनी सहित अनेक व्यापारी उपस्थित थे।