लालचंद सिंह ने जिलाधिकारी और एसडीएम चकिया से की हस्तक्षेप की मांग, वन विभाग की जिम्मेदारी पर भी उठाए सवाल

जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं से फसल बर्बाद, किसानों ने मुआवजे व सुरक्षा की उठाई मांग

लालचंद सिंह ने जिलाधिकारी और एसडीएम चकिया से की हस्तक्षेप की मांग, वन विभाग की जिम्मेदारी पर भी उठाए सवाल

चकिया, चंदौली। जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं द्वारा खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने से किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी फसलें ही सुरक्षित नहीं रहेंगी तो खेती से आमदनी बढ़ाने का सपना कैसे पूरा होगा? फसल की लागत, मेहनत और समय लगाने के बाद जब खेतों में नुकसान होता है तो किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।

किसान लालचंद सिंह ने जिलाधिकारी एवं उपजिलाधिकारी चकिया से इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों के हमलों और छुट्टा पशुओं द्वारा फसल बर्बाद किए जाने की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए। प्रशासन को प्रभावित किसानों की शिकायतों की जांच कराकर नियमानुसार मुआवजा दिलाने तथा फसलों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।

वन विभाग की जिम्मेदारी पर उठाए सवाल

लालचंद सिंह का कहना है कि चकिया वन रेंज कार्यालय लगभग 500 मीटर की दूरी पर होने के बावजूद किसानों को जंगली जानवरों से फसल बचाने की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से वन्यजीवों की निगरानी और उनके कारण होने वाले नुकसान को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब वन क्षेत्र से निकलकर जंगली जानवर खेतों में पहुंचते हैं और फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, तो प्रभावित किसानों की सुरक्षा और उनकी क्षति की भरपाई के लिए क्या व्यवस्था की जा रही है? उन्होंने प्रशासन से वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर इस समस्या का समाधान निकालने की अपील की।

वन भूमि से बेदखली के आरोप भी उठाए

किसान लालचंद सिंह ने यह आरोप भी लगाया कि वन विभाग द्वारा तीन पीढ़ियों से अधिक समय से वन भूमि पर आबाद किसानों को बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में लागू कानूनों और प्रत्येक परिवार के भूमि संबंधी दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जाए। वहीं, वन्यजीवों से फसल को होने वाले नुकसान के मामले में भी किसानों की शिकायतों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रशासन से जांच और मुआवजे की मांग

लालचंद सिंह ने जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी चकिया और वन विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कराया जाए। फसल नुकसान का आकलन कर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाए तथा जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं से खेतों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।

उन्होंने कहा कि किसानों की आजीविका खेती पर निर्भर है। ऐसे में फसल की सुरक्षा, नुकसान की भरपाई और किसानों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं।